स्वावलंबी बन महिला समूहों ने कोरोना के खिलाफ जंग में किया सहयोग
- फोटो : AMAR UJALA
मीनू बांगड़ माई
करनाल। मंगलौरा गांव स्थित दो महिला समूह कोरोना वायरस से ग्रामीणों को बचाने के लिए अपनी सामाजिक भूमिका निभा रहे हैं। श्रीराम महिला समूह व श्री कृष्णा महिला समूह में 15-15 सदस्य हैं। लॉकडाउन के बाद से इन महिलाओं ने समूहों की बचत के पैसे से मास्क तैयार करके ग्रामीणों को वितरित किए। इन महिलाओं के प्रयासों की क्षेत्र में सराहना की जा रही है। जन कल्याण समिति व नाबार्ड की प्रेरणा से करीब चार साल पहले गांव में यह दोनों समूह गठित किए गए थे। समिति ने समूह सदस्यों को सिलाई-कढ़ाई इत्यादि का प्रशिक्षण दिलाकर स्वावलंबन की राह दिखाई। एक साल पहले नाबार्ड के डीडीएम अभिमन्यु मलिक की प्रेरणा से दोनों समूहों को समिति ने राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में दुग्ध उत्पादन बनाने का प्रशिक्षण दिलाया। उसके उपरांत नाबार्ड के सहयोग से समूहों को साढ़े दस-दस लाख रुपये का ऋण बैंक से डेयरी फार्मिंग के लिए दिलाया गया। डेयरी फार्मिंग व दुग्ध उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लेने के उपरांत इन सदस्यों ने दिलचस्पी से काम किया। सभी ने एक-एक भैंस खरीदी और दूध उत्पादन शुरू किया। इसके साथ ही दूध, पनीर, दही, मक्खन, देसी घी, मैंगो लस्सी व आइसक्रीम तैयार करके खुद मार्केटिंग करने लगी। यह दोनों समूह शादी-विवाह व पार्टियों के लिए दुग्ध पदार्थ आर्डर पर तैयार करते हैं। अच्छी बात यह है कि एक समूह अपनी आमदन से हर महीने बैंक ऋण में एक लाख रुपये किस्त जमा करवा रहा है। इससे समूह सदस्यों के हौसले बुलंद हैं। शुरूआती चरण में समूहों की सदस्यों ने दो-दो सौ रुपये प्रतिमाह की बचत की थी और आज स्वावलंबन का अहसास उन्हें हो चुका है। श्रीराम महिला समूह की प्रधान बबीता ने कहा कि नाबार्ड के सहयोग से यह समूह आगे बढऩे में कामयाब हुए। जन कल्याण समिति की उप प्रधान राजबाला मान ने कहा कि कोरोना के खिलाफ चल रही लड़ाई में यह समूह सदस्य स्वयं की बचत के पैसे से मास्क बनाकर श्रमिकों, किसानों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को बांट रही हैं। मान ने कहा कि कोरोना महामारी के चलते अपने समाज व देशवासियों की सुरक्षा सबसे अहम है। --- मीनू बांगड़।