कर्मबीर लाठर
करनाल। कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन के दौरान शिक्षा प्रणाली काफी प्रभावित हुई है। ऐसे में शिक्षण संस्थानों ने ऑनलाइन एजुकेशन को अपनाया है। विद्यालयों में जोर दिया गया कि मोबाइल फोन के माध्यम से बच्चों को होमवर्क भेजा जाए। लेक्चर के वीडियो या आडियो भेजे जाएं। इसके अलावा शिक्षा को जारी रखने का कोई विकल्प भी नहीं। ऐसे में मोबाइल फोन की स्क्रीन की रेडिएशन से नाजुक आंखों पर किसी प्रकार का असर पड़ सकता है या नहीं इस पर असमंजस की स्थिति है। नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. संजीव अरोड़ा ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान मोबाइल फोन से होमवर्क करना ही पड़ेगा। इस दौरान ध्यान देने की बात यह है कि आंखों को निश्चित विश्राम जरूरी देना चाहिये। यदि कंप्यूटर पर काम करते हैं तो एक निश्चित दूरी बनाए रखना चाहिये। दूसरी मुख्य बात यह है कि आंखों को लगातार झपकाते रहें। इससे आंखों पर किसी प्रकार का विपरीत असर नहीं पड़ेगा। जब झपकती हैं तो दोनों पलक आपस में टच करती हैं। यदि अच्छे से नहीं झपकाएंगे तो आंखों में से आंसू या पानी नहीं निकल पाएगा। जब कंप्यूटर पर काम करना है तो आंखों को बीच-बीच में विश्राम व झपकना जरूरी है। इसके साथ ही पानी खूब पीयें। बॉडी को हाइडे्रेटिड रखें। डा. अरोड़ा ने कहा कि मोबाइल फोन पर होमवर्क पूरा करने के बाद बच्चों के पास जो एंटरटेनमेंट का समय है उसमें मोबाइल की बजाय अभिभावक अन्य गतिविधि से जुड़ें। जूड़ो व कैरम बोर्ड से खेलें। वह समय मोबाइल फोन पर नहीं हो। उस चेन को तोडऩा है। इससे रेडिएशिएन से बचाव होगा। आंखों को तीन तरह की रेंज में काम करती है। नजदीक करीब 40 सेंटीमीटर, इंटरमीडिएट करीब 60 से 80 सेंटीमीटर तथा उससे आगे ज्यादा दूरी। इसे रेंज आफ विजन बोलते हैं। बच्चे टीवी या मोबाइल फोन पास से देखते हैं तो आंखें गढ़ा कर देखते हैं। इस दौरान ब्लींकिंग नियमित रूप से नहीं होती। इस बात का ध्यान जरूर रखना है। टीवी देखते समय भी दूरी बनाएं। जितनी आवश्यकता है मोबाइल फोन को उतना इस्तेमाल करें। जिसको जैसी आदत डालों वैसी डल जाती है। यदि आंखों सारा दिन स्क्रीन पर रखेंगे तो आंखें उसी रेंज के लिए काम करेंगी। खिडक़ी में से हरियाली को देखें और कंप्यूटर या मोबाइल फोन पर काम करते वक्त आंखों को सुकून भी अवश्य दें। अन्यथा मायनस का नंबर बढऩे का चांस रहेगा। --- कर्मबीर लाठर।