करनाल। जाट-झोटा वाली टिप्पणी से विवादों में आए बिजली निगम सोनीपत के निलंबित एसई गीतू राम तंवर ने सोमवार सुबह जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली। सेक्टर-9 में रहने वाले गीतू का शव सुबह करीब आठ बजे उनके घर से कुछ दूरी पर स्थित डीएवी स्कूल के पास उनकी ही कार में मिला। वे करीब एक घंटा पहले सुबह सात बजे घर से आखिरी चिट्ठी देने की बात कहकर निकले थे। जब नहीं लौटे तो परिजन उन्हें ढूंढने लगे। बेटी नीति ने कार स्कूल के पास देखी, जिसमें गीतू राम अचेत पड़े थे। परिजन उन्हें इलाज के लिए निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। प्राथमिक जांच में मौत का कारण जहरीला पदार्थ निगलना सामने आया है।
डीएसपी महावीर ने बताया कि जांच के दौरान पुलिस को कार से तीन पेज का नोट मिला है। इसमें एक आईएएस अधिकारी और एक एसई, तीन एक्सईएन, चार एसडीओ और एक अन्य समेत 10 अधिकारियों के नाम का जिक्र कर रंजिश रखने, मानसिक रूप से परेशान करने और उनके निर्देशों की अनदेखी करने के आरोप लगाए गए हैं।
करीब तीन दशक से अधिक की सरकारी सेवा के बाद सोमवार को ही गीतू राम को सेवानिवृत्त होना था। गीतू अपने उस वीडियो से चर्चा में आए थे, जिसमें वे कहते नजर आ रहे थे अब तो सोच लिया है कि जाट और झोटा जहां मिलेगा, वहीं लठ मारेंगे और दोनों में से किसी को नहीं बख्शेंगे। इसी मामले में यूएचबीवीएन ने दो अप्रैल 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया था। पत्र में पत्नी प्रीति के नाम से लिखा कि समाज खराब हो गया है, अपना ख्याल रखना...। बरामद नोट पर 30 अगस्त की शाम 7 बजे और 31 अगस्त की तारीख लिखकर हस्ताक्षर हैं।
कोर्ट केस से रंजिश का आरोप, हिरासत में लेकर जांच की मांग
बिजली निगम के निलंबित सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर गीतू राम तंवर ने 30 अगस्त 2026 को लिखे पत्र में कई अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पत्र में उन्होंने पूर्व कोर्ट केस को लेकर अधिकारियों द्वारा उनके प्रति रंजिश रखने, उनके निर्देशों की अवहेलना करने और खुलेआम जातिगत टिप्पणियां करने का आरोप लगाया है। तंवर ने सरकार से संबंधित अधिकारियों को पुलिस हिरासत में लेकर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
बिजली निगम के एमडी से लेकर 10 लोगों के नाम का किया जिक्र, बताया जिम्मेदार-
कार से मिले नोट में एक्सईएन रणबीर देशवाल, एक्सईएन अश्वनी कौशिक, एसडीओ सतीश गोयत और एसडीओ प्रदीप कुमार के नाम का जिक्र करते हुए लिखा है कि ये अधिकारी पिछले कोर्ट केस के कारण उनसे गहरी रंजिश रखते हैं। केस के बाद ये अधिकारी उन्हें अपना बॉस नहीं मानते थे और खुले तौर पर जातिगत टिप्पणियां करते थे। उनके दिए निर्देशों की भी अवहेलना की जाती थी।
पत्र में पूर्व एसई मनबीर सिंह और मोहित भटनागर का भी जिक्र किया है। आरोप है कि ये अधिकारी उक्त अधिकारियों का खुले तौर पर समर्थन करते थे और उनके व्यक्तिगत रिकॉर्ड को खराब करने का प्रयास करते थे। इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश न हो, यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।
तंवर ने हरियाणा सरकार से अनुरोध किया कि जिन अधिकारियों के नाम पत्र में लिखे हैं, उन्हें पुलिस हिरासत में लेकर मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। पत्र में एक्सईएन राज सिंह, एसडीओ आशीष और एसडीओ रूपेश के नाम का भी जिक्र कर आरोप लगाया कि ये अधिकारी भी पीछे से उक्त अधिकारियों का समर्थन कर रहे थे और इसके पीछे जातिगत कारण होने का दावा किया। पत्र के अंत में एमडी विजय सिंह (आईएएस) का उल्लेख करते हुए उन्हें भी पूरे मामले के लिए जिम्मेदार बताया है। लिखा कि उनके द्वारा पहले दिए गए पत्रों में लगाए गए आरोपों से इसकी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
फिलहाल केवल गीतू तंवर की मौत और सुसाइड नोट की जानकारी मिली है। अब तक परिजनों की ओर से पुलिस को कोई लिखित शिकायत नहीं दी गई है। शिकायत के आधार पर ही आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- महावीर सिंह, डीएसपी, करनाल