करनाल। प्रदेश में ऐसी भूमि जो कृषि करने लायक नहीं बची है, अब उसका इस्तेमाल मत्स्य पालन के लिए किया जाएगा। इसके लिए विशेष तौर पर सर्वे करके बंजर जमीन की पहचान की जाएगी। इस कार्य में सहयोग के लिए मत्स्य पालन विभाग ने पंचायत विभाग के माध्यम से सभी पंचायतों को पत्र लिखकर उनके यहां का रिकार्ड मांगा है ताकि जमीन का एरिया तय करने के बाद उस पर मत्स्य पालन को लेकर कार्य शुरू किया जा सके। यह जानकारी करनाल पहुंचे मत्स्य पालन विभाग हरियाणा के निदेशक प्रेम सिंह मलिक ने दी। वह कर्ण लेक पर 11 जिलों के मत्स्य अधिकारियों की बैठक लेने पहुंचे थे।
बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सरकार का यह बड़ा कदम है। विभाग मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने, उसकी मार्केटिंग करने और किसानों को उनके उत्पादन का अच्छा भाव दिलाने को लेकर गहन मंथन में जुटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेशानुसार प्रदेश की बंजर भूमि जो कृषि योग्य नहीं है, उसको विभाग पट्टे पर लेगा और कलस्टर के हिसाब से भूमि को पट्टे या लीज पर किसानों को देकर उसमें मछली पालन किया जाएगा। वहीं मत्स्य विभाग की ओर से आरएएस तकनीक के माध्यम से वर्ष 2022 तक मछली उत्पादन को तीन गुना बढ़ाने की योजना भी बनाई जा रही है। -संवाद
एक एकड़ में 10 एकड़ जितना होगा उत्पादन
निदेशक ने बताया कि मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने आरएएस स्कीम चलाई है। आमतौर पर जो उत्पादन 10 एकड़ से मिलता है, वो भविष्य में एक एकड़ से ले सकेंगे। बड़ा लाभ यह भी होगा कि इसमें 90 प्रतिशत पानी को पुन: उपयोग में लाया जा सकेगा। वहीं जो तालाब कम दूषित होते हैं, मछली पालन से उनका पानी साफ हो जाता है। पंचायतों को काफी मात्रा में आर्थिक लाभ होगा।
18260 हेक्टेयर में होता है मछली उत्पादन
वर्तमान में प्रदेश में 2.31 लाख मीट्रिक टन मछली उत्पादन 18260 हेक्टेयर भूमि में हो रहा है। वहीं ग्रामीण एरिया में 10421 तालाबों में मछली पालन का व्यवसाय किया जा रहा है। जिसको अगले कुछ सालों में तीन गुना किया जाना है। हरियाणा में चार मछली मार्केट फरीदाबाद, पानीपत, यमुनानगर व बहादुरगढ़ में हैं, जहां किसान अपना उत्पादन आसानी से बेच सकता है।