माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। स्टोक कांगरी और माउंट सतोपंथ के बाद कर्ण नगरी के युवा सुनील रोहिल्ला ने अब माउंट कुन की चोटी पर तिरंगा फहराकर जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया है। आजादी के अमृत महोत्सव के मौके पर राजस्थान के दो युवाओं के साथ पर्वतारोही सुनील ने 20 दिन में यह मुकाम पाया। इस दौरान उनकी राह में बर्फबारी, तेज हवाएं और खराब मौसम बाधा भी बना, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कुन की 7077 मीटर की ऊंचाई पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लक्ष्य को पूरा किया।
मूल रूप से गांव रसूलपुर कलां निवासी एवं इंडियन बैंक में क्लर्क सुनील का अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट की चोटी को फतह करना है। इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। अप्रैल 2023 में उनकी इस लक्ष्य के लिए चढ़ाई शुरू होगी। राजस्थान के राहुल और राकेश बिश्नोई के साथ तीन अगस्त को सुनील रोहिल्ला कुन के लिए करनाल से रवाना हुए थे और ध्वज फहराकर बुधवार को घर लौटे हैं। उनका कहना है कि मंजिल पाने के लिए राह में कई बाधाएं आती हैं पर हमें हौसला रखते हुए हार न मानते हुए लक्ष्य की प्राप्ति के प्रयास करने चाहिए। उनकी राह में भी मौसम बाधा बना था, लेकिन वे डटे रहे। आखिर मौसम साफ होने के बाद उन्हें अपने लक्ष्य की प्राप्ति हुई।
बर्फबारी ज्यादा होने पर कैंप तीन में रहे दो रात
सुनील रोहिल्ला ने बताया कि माउंट कुन लद्दाख के कश्मीर-जांस्कर सीमा के साथ नियंत्रण रेखा के भारतीय हिस्से में जांस्कर रेंज की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है। चार अगस्त को सपथनाला से उनके सफर की शुरुआत हुई थी। यहां पहला कैंप लगाया। उनके सफर में कुल पांच कैंप लगे। कैंप तीन यानी सबमिट कैंप पर उन्हें बर्फबारी ज्यादा होने के कारण दो रात गुजारनी पड़ी। 16 अगस्त को जब मौसम कुछ साफ हुआ तो वे अपने अंतिम पड़ाव की और बढ़े व चोटी पर पहुंचकर ध्वज फहराया।
अब तक की उपलब्धि
- सितंबर 2021 में उत्तराखंड के गढ़वाल मंडल में हिमालय की गंगोत्री रेंज में दूसरे सबसे ऊंचे माउंट सतोपंथ (7075 मीटर)
- 2018 में लद्दाख की 6153 मीटर स्टोक कांगरी चोटी को फतह किया।
- अब तक हिमालय के सिक्किम, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के 50 से ज्यादा ट्रैक पार किए।
माउंट एवरेस्ट के बारे में पढ़कर बढ़ी जिज्ञासा
सुनील ने बताया कि उन्होंने बेसिक व एडवांस माउंटेनियरिंग कोर्स अप्रैल व अक्टूबर 2019 में हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट दार्जिलिंग से किया। स्कूली शिक्षा के समय से ही उनका पर्वतारोहण का सपना था। माउंट के बारे में सुनकर वे सोशल मीडिया पर भी पढ़ते थे। 2014 में चंडीगढ़ में बैंकिंग की तैयारी के दौरान उन्होंने कई पर्वतारोही युवाओं के साथ चर्चा करके अपनी योजना बनानी शुरू की। तब से वे लक्ष्य तक पहुंचने के लिए रोजाना 20 किलोमीटर की दौड़ भी लगाते हैं।