वाहन चलाने से पहले हर विद्यार्थी को यातायात नियमों की जानकारी हो और उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस भी हो। इसके लिए सीएम की ओर से शिक्षण संस्थानों में ही विद्यार्थियों के लर्निंग डीएल बनाने की घोषणा की गई थी। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण विद्यार्थियों के लाइसेंस बनना तो दूर 11 माह से योजना की शुरुआत ही नहीं हुई। अब यातायात के नए नियम लागू होने के बाद अधिकारियों की लापरवाही के कारण विद्यार्थियों को चालान और लाइसेंस बनवाने के लिए सरल केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। घोषणा के कुछ समय बाद ही उच्चतर शिक्षा विभाग की ओर से इस योजना को सिरे चढ़ाने के लिए पत्र भी जारी किया गया था, लेकिन स्थानीय अधिकारियों की ओर से इस दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए।
रोजाना 200 से ज्यादा के बन रहे डीएल
एक सितंबर से लागू नए ट्रैफिक नियमों में बढ़े जुर्माने से बचने के लिए काफी संख्या में युवा लघु सचिवालय स्थित सरल केंद्र में पहुंच रहे हैं। जो अभी तक अपने वाहनों से बिना ड्राइविंग लाइसेंस के शिक्षण संस्थानों में आ जा रहे थे। क्योंकि नए एक्ट में बिना लाइसेंस के ड्राइविंग पर 500 रुपये से बढ़ाकर 5000 रुपये तक तक का जुर्माना कर दिया गया है। करनाल सरल केंद्र में एक सितंबर से पहले डीएल बनवाने के जहां 120 आवेदन आते थे। अब उनकी संख्या 200 तक पहुंच गई है।
पानीपत में की थी सीएम ने घोषणा
एक नवंबर 2018 को पानीपत रैली में सीएम ने शिक्षण संस्थानों के प्रिंसिपलों द्वारा 18 साल या अधिक आयु के विद्यार्थियों के लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बनाकर देने की घोषणा की थी। योजना के तहत लर्निंग लाइसेंस के लिए सभी कॉलेजों में एक-एक नोडल अफसर और कंप्यूटर पर काम करने के लिए एक-एक डाटा एंट्री ऑपरेटर और कागजातों की जांच के लिए क्लर्क रहेगा। इसको लेकर शुरुआत में निदेशालय हरकत में दिखा। इस योजना के पीछे यह भी मकसद था कि डीएल बनवाने के लिए दौड़धूप में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
ज्यादातर विद्यार्थी अपने वाहन से पहुंचे हैं कॉलेज
स्कूल-कॉलेजों में पढ़ने वाले शहरी और निकटवर्ती ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थी समय बचाने के लिए अपने दोपहिया वाहनों से ही आवागमन करते हैं। अब नए मोटर व्हीकल एक्ट के लागू हो जाने से विद्यार्थियों के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता बढ़ गई है। परंतु लाइसेंस बनवाने के लिए एसडीएम कार्यालय पर लगने वाली अभ्यर्थियों की लंबी लाइन के चलते विद्यार्थी लाइसेंस नहीं बनवा पा रहे।
लर्निंग डीएल बनाने के लिए करना होगा इनका प्रबंध
-एक-एक लाइसेंस अधिकारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर और क्लर्क।
-एक कमरा जहां विद्यार्थी आवेदन देंगे और ऑफिसर द्वारा कागजों की जांच की जाएगी।
-स्टॉल टेस्ट के लिए कमरा या केबिन।
-यूपीएस लगे 3 कंप्यूटर और प्रिंटर।
-एचडी वेबकैम और डिजिटल सिग्नेचर पैड।
योजना शुरू होना तो दूर ट्रेनिंग भी नहीं हो पाई : प्रिंसिपल
आईटीआई के प्रिंसिपल बलदेव सगवाल ने बताया कि योजना को शुरू करने के लिए कर्मचारियों की ट्रेनिंग कराई जानी थी। इसकी जिम्मेवारी एसडीएम की थी, लेकिन योजना शुरू करना तो दूर एसडीएम की ओर से कर्मचारियों की ट्रेनिंग भी नहीं कराई गई। न ही कोई सामान आया है।