माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। ग्रेप-2 लागू होने के बाद प्रशासन की लापरवाही के कारण शहर का एक्यूआई 269 तक पहुंच चुका है। जो सेहत के लिए बेहद खराब है। केवल कागजों में ही सख्ती दिखाई दे रही है जबकि धरातल पर कार्रवाई शून्य है। शहर के औद्योगिक सेक्टरों में सेक्टर तीन में डीजल जेनरेटर चल रहे हैं। सड़कों पर कूड़ा जल रहा है। हर सड़क पर वाहनों के आवागमन के दौरान धूल उड़ रही है।
हैरानी की बात ये है कि ग्रेप के दूसरे चरण के चार दिन बीत जाने के बाद नगर निगम ने शहर में पानी के छिड़काव का फैसला लिया है। इसके लिए इस्तेमाल होने वाला पानी एसटीपी से लिया जाएगा। हालांकि शहर में जहां टी-फ्लाईओवर का निर्माण हो रहा है वहां एजेंसी की ओर से पानी का छिड़काव पहले से कराया जा रहा है। निगम अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने टीम को सक्रिय कर फील्ड में उतार दिया है। शहर में पानी का निरंतर छिड़काव कराया जा रहा है। इसके लिए पानी के दो टैंकर लगाए गए हैं। इसके अलावा निर्माण स्थलों पर सामग्री को कवर कराना सुनिश्चित कराया जा रहा है। कूड़ा जलाने वालों को चेतावनी जारी की गई है। आग लगाने की सूरत में पांच से 25 हजार रुपये का चालान किया जाएगा।
आपातकालीन सेवाओं में रहेगी छूट
अतिरिक्त निगम आयुक्त अशोक कुमार ने सड़कों की यांत्रिक यानी वैक्यूम आधारित सफाई दैनिक आधार पर कराने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विशेष रूप से हॉटस्पॉट, भारी यातायात गलियारों, संवेदनशील क्षेत्रों और निर्दिष्ट स्थलों, लैंडफिल में एकत्रित धूल का उचित निपटान करें। होटलों, रेस्तरां और खुले स्थानों में तंदूरों सहित कोयला व लकड़ी का उपयोग न हो सके। होटल, रेस्तरां और खुले भोजनालय में केवल बिजली या स्वच्छ ईंधन गैस आधारित उपकरणों का उपयोग करें। आपातकालीन और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर डीजल जेनरेटर के उपयोग पर पूर्णत: प्रतिबंद रहेगा।
निर्माण कार्य ढककर रखने होंगे
एडीसी के अनुसार शहर में जितने भी निर्माण स्थल हैं उनमें प्रयुक्त होने वाली सामग्री जैसे बजरी, रेत, सीमेंट, मिट्टी को कवर करवाना सुनिश्चित करना होगा। इसके अतिरिक्त निर्माण कार्य भी ग्रीन कवर या टीन इत्यादि से ढक कर करना होगा। इसके लिए कनिष्ठ अभियंता, सफाई निरीक्षक व भवन निरीक्षक की अलग-अलग टीमें बना दी गई हैं, जो फील्ड में उतर गई हैं।