करनाल। हरियाणा के चार किसानों ने पारंपरिक खेती छोड़ पानी और पर्यावरण बचाने के लिए बागवानी में हाथ आजमाकर कमाल कर दिया। तकनीक के सहारे किसी ने बेहद कम लागत पर ज्यादा उत्पादन करके अपनी आय को बढ़ाया तो किसी ने नौकरी छोड़कर बागवानी में नवाचार को अपना व्यवसाय बनाया।
ऐसे चार किसानों को वीरवार को करनाल में महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेमीनार में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उद्यान रत्न पुरस्कार-2026 देकर सम्मानित किया। इनमें करनाल के इनोवेटिव सजावटी बागवानी उद्यमी नितिन ललित, झज्जर के दलवा निवासी प्रगतिशील सब्जी उत्पादक नवीन कुमार, पंचकूला के बडियाल निवासी इनोवेटिव मशरूम उत्पादक वीरेंद्र बाजवान और नारनौंद के प्रगतिशील फल एवं सब्जी उत्पादक कुलदीप आर्य शामिल हैं। अमर उजाला से बातचीत में चारों ने अपने अनुभव साझा किए।
कम पानी पर पौधों को जल्दी ग्रोथ करने वाले गमले किए तैयार
करनाल की बैंक कॉलोनी के रहने वाले इनोवेटिव सजावटी बागवानी उद्यमी नितिन ललित ने अल्फा प्लांटर तैयार किया है। ये ऐसे गमले हैं जो रि-साइकिल प्लास्टिक से बने हैं और बेहद कम पानी पर पौधों को लंबे समय तक जीवित व जल्दी ग्रोथ देने वाले हैं। तीन चैंबर के इन गमलों में लगे पौधे को 10 दिन में महज एक बार नाम मात्र पानी देने की जरूरत पड़ती है। पहले चैंबर में मिट्टी डलती है, दूसरे में हवा रहती है और तीसरे में न्यूक्लियर के साथ डिस्चार्ज पानी रहता है। आठ साल से ये कार्य कर रहे हैं और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से 24 लाख रुपये का अनुदान भी ले चुके हैं।
-
स्ट्रक्चर तकनीक से बढ़ा कई गुना उत्पादन
झज्जर के दलवा निवासी प्रगतिशील सब्जी उत्पादक नवीन कुमार छह वर्ष से आर्गेनिक खेती कर रहे हैं। टमाटर, खरबूजा, तरबूज, लॉकी की 10 एकड़ में बागवानी से वे अच्छा कमा रहे हैं। उनका कहना है कि स्ट्रक्चर पर बागवानी से उत्पादन भी अच्छा हो रहा है और पूरी तरह से आर्गेनिक भी है। महज 10वीं पास किसान की इस तकनीक के आधार पर उनका पुरस्कार के लिए एमएचयू की टीम ने चयन किया। वे झज्जर सहित आधे हरियाणा में इस तरह से खेती करके प्रगतिशील किसान के रूप में मिसाल बने हैं।
12 तरह की औषधीय मशरूम की तैयार, 190 आईटीआई में करते हैं जागरूक
पंचकूला के मोरनी क्षेत्र के बडियाल गांव निवासी इनोवेटिव मशरूम उत्पादक वीरेंद्र बाजवान 2009 से औषधीय मशरूम की खेती कर रहे हैं। उनके पास गैनोडरमा, शिटाके, ओएस्टर समेत 12 तरह मशरूम है, जो शुगर, जोड़ो के दर्द और कैंसर में काम आती है और ये मशरूम एनर्जी बूस्टर है। सालाना 24 लाख तक कमाने वाले इस किसान के छह फार्म हैं। वे नौ डिप्लोमा कर चुके हैं और सरकारी नौकरी भी छोड़ी है। वर्तमान में 190 आईटीआई संस्थानों में विद्यार्थियों को मशरूम की खेती पर जागरूक करते हैं। 2025 से अब तक पांच बार अलग-अलग मंच पर सीएम सम्मानित हो चुके हैं।
पर्याप्त पानी, फिर भी धान छोड़ा तो आज कमा रहे 22 लाख सालाना
नारनौंद निवासी प्रगतिशील फल एवं सब्जी उत्पादक कुलदीप आर्य 10 एकड़ में 10 साल से बागवानी कर रहे हैं। उन्होंने 2016 के बाद से धान की खेती छोड़कर नींबू, अमरूद, किन्नू, पपीता और केला लगाना शुरू किया। उनका कहना है कि उनके खेत में दो ट्यूबवेल हैं, पर्याप्त नहरी पानी भी है। फिर भी सरकार के आह्वान पर उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़ी तो आज सालाना 22 लाख रुपये तक कमा रहे हैं। महज 10वीं पास ये किसान शुरुआत से ही खेती करते हुए अब मिसाल बने हैं।
कुलदीप आर्य की सम्मानित करते मुख्यमंत्री