माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। देश वार्षिक दुग्ध उत्पादन 221.1 मिलियन मीट्रिक टन और प्रति व्यक्ति दुग्ध की उपलब्धता 444 ग्राम प्रति दिन का आंकड़ा पार कर चुका है, जो पूरी दुनिया के औसत उपलब्धता 322 ग्राम प्रति दिन से अधिक है लेकिन देश में दूध और दूध उत्पादों की कुल मांग को पूरा करने के लिए वर्ष 2033 तक प्रति वर्ष 330 मिलियन मीट्रिक टन दूध के उत्पादन की आवश्यकता है, इसमें जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ कई बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (एनडीआरआई) करनाल के निदेशक डॉ. धीर सिंह के अनुसार भारत दुनिया में सबसे बड़े दूध उत्पादक के रूप में उभरा है। डॉ. कुरियन के नेतृत्व में, ''ऑपरेशन फ्लड'' कार्यक्रम ने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दूध उत्पादक बनने में सक्षम बनाया और भारतीय डेयरी उद्योग सबसे बड़ा आत्मनिर्भर उद्योग बन गया।
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान और एनडीडीबी ने गुणवत्तापूर्ण जर्म प्लाज्म, विशिष्ट नस्लों, कुशल जनशक्ति और मूल्यवान अंतदृष्टि और समय पर इनपुट का उत्पादन करके राष्ट्र की श्वेत क्रांति का समर्थन किया है। इन सामूहिक प्रयासों से देश 1998 से लगातार विश्व के सबसे बड़े दूध उत्पादक के रूप में बादशाहत कर रहा है।
राह आसान नहीं, बहुत कुछ करना अभी बाकी
देश में डेयरी मांग को पूरा करने के लिए अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। बढ़ती जनसंख्या के बीच एक अनुमान के मुताबिक देश की दूध और उसके उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए भारत को 2033 तक प्रति वर्ष 330 एमएमटी दूध का उत्पादन करने की आवश्यकता है। दूध उत्पादन में वृद्धि औसतन 6.6 प्रतिशत थी, लेकिन लक्षित 330 एमएमटी प्राप्त करने के लिए, कम से कम 14 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर हासिल करनी होगी। लेकिन जब चारे की बढ़ती लागत, घटती कृषि भूमि, उभरती बीमारियों आदि बाधाओं को देखते हैं तो राह आसान नहीं लग रही है। - डॉ.धीर सिंह, निदेशक एनडीआरआई करनाल।
कल दुग्ध दिवस पर लगेगी प्रदर्शनी
राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान करनाल 26 नवंबर डॉ. वर्गीस कुरियन (श्वेत क्रांति के जनक) की 102 वीं जयंती मनाने के लिए राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाएगा। निदेशक और कुलपति डॉ. धीर सिंह ने बताया कि इस अवसर पर, सुबह 10:30 बजे मिल्क पार्लर में संस्थान में विकसित प्रौद्योगिकियों/उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रदर्शनी का आयोजन करेगा। इस दिन मिल्क पार्लर खुला रहेगा।