- ग्राम स्तर पर मिलेगी स्वास्थ्य सुविधाएं, खान-पान में लाया जाएगा बदलाव, मरीजों का आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी पद्धति से होगा उपचार
- जनसंख्या का स्वास्थ्य सर्वेक्षण कर डाटाबेस होगा तैयार, ताकि कोई भी जीवनशैली संबंधी विकार के कारण न हो गंभीर बीमारी का शिकार
गगन तलवार
करनाल। भारत सरकार की राष्ट्रीय आयुष मिशन योजना के अंतर्गत अब प्रदेश के गांवों को आयुष ग्राम बनाया जाएगा। इसकी शुरुआत करनाल से होने जा रही है, यहां के स्टौंडी गांव का आयुष ग्राम के लिए चयन हुआ है। इससे गांव के लोगों को ग्राम स्तर पर ही स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जाएंगी। वहीं, भविष्य में कोई गंभीर बीमारी से ग्रस्त न हो, इसके लिए भी विशेष योजना बनेगी।
अधिकारियों के अनुसार, आयुष ग्राम बनने वाले गांव के प्रत्येक व्यक्ति के स्वास्थ्य का ध्यान अब आयुष विभाग रखेगा। शुरुआत में सबसे पहले गांव के लोगों के खान-पान में बदलाव लाया जाएगा। इसके लिए उन्हें विशेष तौर पर जागरूक करेंगे कि किस ऋतु या मौसम में वे कैसा खाना खाएं। साथ ही गांव के मरीजों का आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी पद्धति से उपचार किया जाएगा। इसके अलावा गांव की पूरी आबादी का स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराकर भी विभाग डाटाबेस तैयार करेगा। ताकि पता चल सके कि लोगों को किस तरह की स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें ज्यादा रहती हैं। भविष्य में उन्हें इन बीमारियों से कैसे बचाया जा सकता है। डाटाबेस के आधार पर कार्य करते हुए यह भी तय किया जाएगा कि कोई भी व्यक्ति जीवनशैली संबंधी विकास के कारण बीपी, शुगर और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का शिकार न हो पाए।
सरकार की योजना के तहत शुरुआत में प्रदेश के प्रत्येक जिले के एक-एक गांव को आयुष ग्राम बनाया जाना है। इसके लिए निदेशालय की ओर से सभी जिला अधिकारियों से एक-एक गांव का चयन करके नाम भेजने के लिए भी निर्देश दिए हैं। करनाल ने पहल करते हुए स्टौंडी गांव को आयुष ग्राम बनाने के लिए चुना है। साथ ही अगले एक साल में विभाग की ओर से लोगों के स्वास्थ्य, जीवन स्तर और जीवनशैली में बदलाव संबंधित गतिविधियां आयोजित करने की रुपरेखा बनाकर भी निदेशालय को भेज दी है। ब्यूरो
प्रधानमंत्री कर चुके स्टौंडी केंद्र का उद्घाटन
केंद्र सरकार की ओर से 2019 में देश में 10 आयुष हेल्थ एंड वेलनेस केंद्र खोले गए थे। इनमें एक केंद्र स्टौंडी गांव में भी बना था, जिसका उद्घाटन 30 अगस्त 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विज्ञान भवन से किया था। इसी की तर्ज पर प्रदेश की आयुष डिस्पेंसरियों को वेलनेस केंद्र के रूप में तैयार किया है। गांव के लोगों में आयुष पद्धति में विश्वास भी ज्यादा है। इसलिए अब विभाग की ओर से इसी गांव को आयुष ग्राम बनाने के लिए चुना है ताकि एक बार फिर प्रदेश के लिए गांव नजीर बने।
गांव में बनेगा हर्बल उद्यान, निशुल्क मिलेंगी दवाएं
आयुष ग्राम में हेल्थ एंड वेलनेस केंद्र की सुविधाएं बढ़ेंगी। हर्बल उद्यान और आयुष पार्क तैयार किया जाएगा, जहां विभिन्न तरह के औषधीय पौधे लगेंगे। गांव में आयुर्वेदिक, होम्योपैथी और यूनानी चिकित्सा पद्धति पर आधारित चिकित्सा शिविर आयोजित होंगे। मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। योग कक्षा और व्यायामशाला स्थापित होगी। विभाग के मुख्य फार्मासिस्ट नरेश कुमार ने बताया कि लोगों के लिए स्वास्थ्य परामर्श शिविर आयोजित करके मौसम अनुसार खान-पान की सलाह देंगे। गांव में आयुष पद्धति संबंधित चिकित्सक व अन्य मेडिकल स्टाफ की तैनाती भी रहेगी।
आयुष ग्राम के लिए सबसे पहले स्टौंडी गांव का चयन किया है। यहां पर आयुष संबंधित स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ेंगी और आबादी को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से योजना बनाते हुए कार्य किया जाएगा। गांव की पूरी आबादी का स्वास्थ्य सर्वेक्षण कराकर डाटाबेस भी तैयार होगा। ताकि लोगों की स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतों का पता चल सके। निदेशालय तक के विशेषज्ञों की टीम का इस गांव के लोगों के स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी रहेगी।
- डॉ. सतपाल, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी