माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। कम कृषि क्षेत्र में अधिक पैदावार के लिए अब विशेष तकनीक तैयार की जाएगी। इसके लिए महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय (एमएचयू) करनाल और कोच्चि विश्वविद्यालय जापान मिलकर काम करेंगे। इंटरनेटस ऑफ प्लाटस (आईओपी) नामक जापानी तकनीक पर अनुसंधान शुरू किया जाएगा। इसके बाद आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक बनाकर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। दरअसल, जलवायु परिवर्तन से खेती पर संकट मंडरा रहा है। जोत घट रही है, खाद्यान्न की मांग बढ़ रही है, ऐसे में कम भूमि पर अधिक और सुरक्षित फसल पैदावार समय की मांग है। ऐसे में डिजिटल बागवानी यानी ग्रीन हाउस खेती की आवश्यकता है। एमएचयू के कुलपति डॉ. सुरेश मल्होत्रा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के समय में कृषि में कई आपदाएं जैसे सूखा, असमय ओलावृष्टि, अधिक वर्षा आदि से नुकसान की संभावना बनी रहती है। हमारी जोत का आकार भी लगातार घट रहा है, जिससे छोटे व मझोले किसानों के लिए कम क्षेत्र से अधिक उत्पादन व अधिक आय लेना एक चुनौती है।
इन्हीं सब बिंदुओं को केंद्र में रखकर महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय करनाल ने ग्रीन हाउस खेती में जापान की इंटरनेटस ऑफ प्लाटस (आईओपी) नामक तकनीक पर अनुसंधान करने के लिए वैज्ञानिकों का एक दल जापान गया था।
13 से 17 जनवरी को एमएचयू के वैज्ञानिकों ने जापान की कोच्चि विश्वविद्यालय का भ्रमण किया और जापानी वैज्ञानिकों के साथ कई बिंदुओं पर चर्चा की।
इस तकनीक से ग्रीन हाउस के अंदर फल, सब्जियां, फूल व मसालों वाली फसलों पर सेंसर संवेदी तकनीक, जिससे ग्रीन हाउस में तापमान, आर्द्रता, प्रकाश संश्लेषण, वार्ष्पोजन आदि के सिद्धांत पर विभिन्न फसलों के लिए इंटरनेटस ऑफ प्लाट्स (आईओपी) मॉडूयल तैयार किए जाएंगे। इस क्षेत्र में महाराणा प्रताप उद्यान विश्वविद्यालय और कोच्चि विश्वविद्यालय जापान ने मिलकर काम करने के लिए एमओयू साइन किया है, ताकि हरियाणा राज्य के लिए इस प्रकार आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक बनाकर किसानों को उपलब्ध कराई जा सके। इससे बागवानी फसलों के उत्पादन, गुणवत्ता आैर अधिक आय की संभावनाएं बढ़ेंगी।