संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि एक से दूसरी पीढ़ी में संस्कार और संस्कृति देने में महिलाओं का अहम योगदान है। इसे महिलाएं बखूबी निभाएं। क्योंकि बच्चे की पहली गुरु मां ही है। यदि वे ही संस्कृति और संस्कार भूल गई तो बच्चों में इसका अभाव रहेगा। राष्ट्र के उत्कर्ष की जिम्मेदारी से भी महिलाएं नहीं बच सकतीं।
करनाल में अपने प्रवास के दूसरे दिन बुधवार को जरनैली कॉलोनी स्थित सतपाल खेत्रपाल के निवास पर स्वामी जी ने महिला संगोष्ठी की। इस दौरान सैकड़ों महिलाओं ने उनसे जीवन से संबंधित सवाल किए। जिनका उन्होंने जवाब दिया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देवताओं के चित्र को पीपल के पेड़ के नीचे नहीं रखना चाहिए। देवताओं का चित्र देव स्थान पर रखा जाए।
महाराज ने कहा कि एक पर्व को दो-दो दिनों में मनाने की परंपरा सही नहीं है। किसी महिला ने वर्ण व्यवस्था पर सवाल किए तो किसी ने देवताओं के अस्तित्व को लेकर सवाल पूछे। एक महिला ने तंत्र और मंत्र को लेकर सवाल किया। उन्होंने महिलाओं से कहा कि वह अपने परिवार से एक रुपया देव स्थान के निमित्त निकालें और प्रतिदिन महिलाओं को गौ ग्रास निकालना चाहिए। मठ-मंदिरों व युवाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वरोजगार के प्रकल्प चलाएं। शंकराचार्य ने कहा कि माताएं अपने बच्चों में धर्म के संस्कार संचारित करती हैं। हमारे भगवान साकार भी हैं और निराकार भी हैं।
संगोष्ठी का संचालन सीमा गुप्ता ने किया। संगोष्ठी के बाद स्वामी निश्चलानंद जी कैथल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम में मेयर रेनू बाला गुप्ता, पार्षद मेद्या भंडारी, पार्षद वीर विक्रम, सुनीता बहल, सुषमा अत्रेजा, सतपाल खेत्रपाल, नरेश अरोड़ा, महेश चावला, पंकज भारती, निर्मल बहल, चंद्र गुप्त ढींगरा, राज बजाज, विनोद खेत्रपाल, रमेश मिड्ढा और विनीत भाटिया उपस्थित रहे।
महिलाओं की संगोष्ठी में अपने विचार रखते पुरी पीठ के पीठाधिश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्च?