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जिनसे बुढ़ापे में थी सहारे की आस, अब वही कर रहे निराश

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सोनाली शर्मा
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करनाल। घर में बेटे के जन्म लेने पर माता-पिता खुशियां मनाते हैं। बड़े लाड-प्यार से उसका पालन-पोषण करते हैं ताकि बड़ा होने पर वह उनका नाम रोशन करेगा और उनके बुढ़ापे का सहारा बनेगा। लेकिन अफसोस की बात है कि यही बेटे बड़े होने के बाद मां-बाप का सहारा बनने के बजाय बुढ़ापे में उन्हें बोझ समझकर घर से निकालने, प्रताड़ित करने जैसे कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं।
ऐसे ही तीन मामले परिवार परामर्श केंद्र में आए हैं जिसमें किसी के बेटे-बहू बुजुर्ग के घर पर ही कब्जा कर उसे निकालने पर तुले हैं तो कोई बेटा बुजुर्ग पिता को खाना देने के बदले पेंशन ही हड़प रहा है और बहू गाली-गलौच व अभद्र व्यवहार कर प्रताड़ित करती है। इन बुजुर्गों ने इंसाफ की गुहार लगाने के लिए परिवार परामर्श केंद्र का दरवाजा खटखटाया और बताया कि वह बच्चों से प्यार करते हैं इसलिए उनके इतने अत्याचारों के बाद भी उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करवाना चाहते।
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मामला 1
छीन लेते हैं पेंशन
धौलगढ़ की रहने वाली 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने बताया कि उसके तीन बेटे हैं। पांच साल पहले उसके पति की मृत्यु के बाद से बेटे-बहू उसके साथ अत्याचार करते हैं। बहुएं दिन भर अपशब्द बोलती हैं और खाना भी बना कर नहीं देतीं। उसे अपने लिए खुद ही खाना बनाना पड़ता है। महिला ने रोते हुए बताया कि उसके बेटे उसे खाना खिलाने के नाम पर उसकी पेंशन छीन लेते हैं। इसके बावजूद महिला अपने परिवार के साथ रहने के मोह में परिवार परामर्श केंद्र पहुंची है। केंद्र ने उसके परिवार की काउंसलिंग शुरू कर दी है।
मामला 2
मकान पर कर लिया कब्जा
मेरठ रोड की रहने वाली 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला को उसके बेटे द्वारा घर से निकालने के लिए मजबूर किया जा रहा है। महिला ने अपने खून-पसीने की कमाई से मकान बनाया था लेकिन बेटे ने उसमें एक मंजिला और बनाकर मकान पर ही कब्जा कर लिया। अब महिला को घर से निकलने के लिए कहा जा रहा। परेशान होकर महिला ने परिवार परामर्श केंद्र में गुहार लगाई है। वह अपने बेटे और बहू के साथ ही रहना चाहती है।
मामला 3
पेंशन मांगता है बेटा
दादूपुर गांव निवासी 72 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि वह अपने छोटे बेटे-बहू के साथ रहना चाहते हैं लेकिन वे उनके साथ अच्छा व्यवहार नहीं कर रहे हैं। बेटा कहता है कि अगर उसके साथ रहना है तो उन्हें अपनी पेंशन देनी होगी। बहू भी उसके साथ गाली-गलौच करती है। इस कारण उसका उनके साथ रहना मुश्किल हो रहा है। बुजुर्ग की शिकायत पर परिवार परामर्श केंद्र ने काउंसलर से परिवार की काउंसलिंग शुरू कर दी है।
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बुजुर्ग अपने बच्चों के प्यार और सम्मान के लिए तरसते हैं। उन्हें न्याय दिलाने के लिए परिवार परामर्श केंद्र सदा तत्पर है। केंद्र में आई सभी बुजुर्गों की समस्याओं को प्राथमिकता से काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
-सुषमा मान, काउंसलर, परिवार परामर्श केंद्र
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