अखिल भारतीय महापौर परिषद की अध्यक्ष और केंद्रीय शहरी कार्यमंत्री एक ही शहर से होने से मुद्दों के निदान की आशा जताई
देव शर्मा
करनाल।
अखिल भारतीय महापौर परिषद (एआईएमसी) की साधारण सभा की बैठक एवं दोदिवसीय सम्मेलन बुधवार को संपन्न हो गया। करनाल की महापौर रेणूबाला गुप्ता के सिर राष्ट्रीय अध्यक्ष का ताज सज गया है। विकास के ये अलंबरदार वापस जाते जाते शहरी सरकार की सियासती के लिए कई बड़े मुद्दे छोड़ गए हैं, जो नई राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए किसी चुनौती से कम नहीं हैं। महापौरों ने उम्मीद जताई है कि अब जबकि परिषद की अध्यक्ष और केंद्रीय शहरी कार्यमंत्री भी करनाल के ही हैं तो सम्मेलन में उठाए गए मुद्दों का कोई समाधान जरूर निकलेगा।
करनाल में हुई अखिल भारतीय महापौर परिषद की वार्षिक साधारण सभा की बैठक में 21 राज्यों से आए सभी 75 महापौर विदा हो चुके हैं। महापौरों ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण के सामने जो मुद्दे उठाए, उनका निस्तारण केंद्र या राज्य सरकार के लिए आसान नहीं होगा। इनमें सबसे बड़ा मुद्दा 73 और 74वें संविधान संशोधन को सभी राज्यों में पूर्ण रूप से लागू करना है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने महापौर परिषद को दिल्ली में समय दिया है, जिसमें मुख्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।
चपरासी के तबादला का भी अधिकार नहीं
- अलीगढ़ के पूर्व मेयर एवं परिषद के पूर्व अध्यक्ष आशुतोष वार्ष्णेय ने कहा कि ग्राम पंचायत के सरपंच और नगर पालिका नगर पंचायत के अध्यक्ष को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार महापौर से ज्यादा हैं। महापौर को तो अपने चपरासी का तबादला करने का भी अधिकार नहीं है, आखिर ये कैसी व्यवस्था है।
सभी राज्यों में सीधे जनता से हो चुनाव
- एआईएमसी की निवर्तमान अध्यक्ष एवं बुरहानपुर (मध्य प्रदेश) की महापौर माधुरी अतुल पटेल ने कहा कि अधिकतर शिकायतें महापौरों के कार्यकाल को लेकर हैं। कहीं एक साल तो कहीं ढाई साल और कहीं पांच साल का कार्यकाल है। ये देशभर में एक समान होना चाहिए। चुनाव सीधे जनता से हो।
शहर समझने से पहले कार्यकाल खत्म
- मध्य प्रदेश के सतना नगर निगम के महापौर योगेश कुमार ताम्रकार ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेशों और दिल्ली जैसे ढाई करोड़ की आबादी वाले शहर में अपने एक साल के कार्यकाल में मेयर पूरे शहर को देख या समझ भी नहीं पाता है। योजना लागू होने लायक होने तक कार्यकाल ही खत्म हो जाता है।
मुद्दों को हल करने के लिए ही चुनाव
- कानपुर की महापौर प्रमिला पांडेय कहती हैं कि मुद्दे तो कई हैं, उन पर चर्चा होती भी रहती है, इसलिए अध्यक्ष का चुनाव कराया गया है। जहां तक बात प्रशासनिक व वित्तीय शक्तियों की है तो वह महापौरों के पास होनी ही चाहिए, क्योंकि जनता उनसे बहुत अपेक्षाएं रखती है, उन्हें व्यवस्था बनानी होती है।
संसाधन, कार्यक्षमता से आगे बढ़ें
- यूपी के मुरादाबाद के महापौर विनोद अग्रवाल कहते हैं कि चुनौतियां तो हैं और रहेंगी लेकिन हमें निरंतर आगे बढ़ने के प्रयास करने होंगे। भाजपा सरकार शहरों की समस्याओं के निदान पर तो गंभीर होकर मदद करती है। शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। संसाधन, मैनपावर व कार्यक्षमता पर कार्य करना आवश्यक है।
तकनीकी मॉडल पर बात था उद्देश्य
उत्तर प्रदेश के लखनऊ की महापौर सुषमा खरकवाल ने कहा कि लखनऊ जैसे शहर में चुनौतियां अधिकारों या शक्तियों को लेकर नहीं हैं। इस बैठक में तो मुख्य बात चुनाव और निकायों के तकनीकी मॉडलों का आदान-प्रदान करने ही आए थे, इससे काफी सीख भी मिली है, जो आगे शहर के विकास में सहायक होगी।
1010 विनोद अग्रवाल
1010 विनोद अग्रवाल
1010 विनोद अग्रवाल
1010 विनोद अग्रवाल
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