नगर निगम प्रशासन ने शहर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में संशोधन कर 1256 एकड़ की कटौती कर दी है। इससे शहर के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का क्षेत्र 2087 एकड़ से कम होकर 829 एकड़ रह गया है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर 21 नवंबर को हुई बैठक में मिले सुझाव के बाद निगम ने यह फैसला लिया है। अब निगम के अधिकारी इसी एरिया के आधार पर फोकस करेंगे।
केंद्र सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी की दौड़ में सबसे आगे चल रहे शहरों से 20 दिसंबर तक अपनी अपनी रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। स्मार्ट सिटी की परीक्षा में क्षेत्र आधारित विकास कार्यों के सबसे अधिक 55 नंबर होने के चलते निगम प्रशासन द्वारा सिर्फ उसी क्षेत्र का चयन किया है, जो शहर को स्मार्ट सिटी कद दौड़ में दौड़ने के काबिल बना सके।
अब ये रहेगा एरिया
नए संशोधन के बाद निगम ने अब सेक्टर- 6व 7 के डिवाइडर से लेकर निर्मल कुटिया चौक, गांधी चौक, कमेटी चौक से रेलवे स्टेशन तक के 829 एकड़ क्षेत्र को स्मार्ट सिटी प्राजेक्ट में शामिल किया है। स्मार्ट सिटी की दौड़ में क्षेत्र आधारित विकास कार्यों में पूरे नंबर मिल सकेें। वहीं, अन्य सुविधाओं के मामले में निगम ने ई-गॉवर्नेंस पर भी अगले कुछ दिनों में विशेष ध्यान देने की जरूरत बताई है।
इसके लिए निगम ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। बता दें कि स्मार्ट सिटी की परीक्षा में सबसे अधिक नंबर क्षेत्र में बिजली, पानी, सड़क, स्वच्छता के होते हैं। इसलिए निगम द्वारा केवल उसी क्षेत्र को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल किया है, जहां पर निगम द्वारा ये सभी सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। क्षेत्र आधारित विकास के बाद ई-गवर्नेंस के प्रोजेक्ट के नंबर होते हैं। इसपर निगम प्रशासन द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैठक में लिया गया था फैसला
गौरतलब है कि स्मार्ट सिटी को लेकर अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसी बैठक में एरिया कम करने का फैसला लिया गया था। स्मार्ट सिटी की टॉप सूची में शामिल होने के लिए ऐसा किया गया है। क्योंकि डेवलप एरिया के नंबर सबसे ज्यादा 55 अंक हैं। इसके बाद ई गवर्नेंस के 45 अंक हैं।
वर्जन
सभी की सहमति से संशोधन किया गया है। हमारा प्रयास है कि देश के टाप स्मार्ट शहरों की सूची में करनाल आए। हम स्मार्ट सिटी के लिए काम कर रहे हैं और 20 दिसंबर तक यह रिपोर्ट भेज देंगे। इसके अलावा, यह संशोधन इसलिए जरूरी था क्योंकि परीक्षा में सबसे ज्यादा अंक इसी के हैं।
सुमेधा कटारिया, निगम आयुक्त।