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हालात : 40 फीसदी स्कूलों में नहीं स्मार्ट बोर्ड

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गगन तलवार
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करनाल। जिले के कई राजकीय स्कूल ऐसे हैं, जहां कमरे या तो खंडहर हालत में हैं या कमरों की कमी है। ऐसे में विद्यार्थी खुले आसमान के नीचे कक्षाएं लगाते हैं। यहां सर्दी में खिली धूप तो गर्मी में पेड़ की ठंडी छांव ही उनका सहारा है।
इसके अलावा कई स्कूलों में पंखे टूटे हैं तो डेस्क भी कंडम स्थिति में हैं। ऐसे में यहां सेक्शन में बांटकर कक्षाएं लगाई जाती हैं। ताकि विद्यार्थियों को ज्यादा परेशानी न झेलनी पड़े। शिक्षक संघ का दावा है कि जिले के 40 फीसदी स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड नहीं हैं।  अमर उजाला ने भी कुटेल, मॉडल टाउन, रेलवे रोड और कंबोपुरा व जुंडला गेट के स्कूलों का जायजा लिया। 
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यह हालात भी तब हैं, जब सालाना तीन करोड़ रुपये का बजट विभाग की ओर से मूलभूत सुविधाओं के लिए जिले के सभी राजकीय विद्यालयों को जारी किया जाता है। इसके बाद भी जिले के कई स्कूलों में शौचालय बदहाल स्थिति में हैं। यहां नियमित सफाई नहीं होती। इसके अलावा गर्मी में विद्यार्थियों के लिए ठंडे पेयजल का इंतजाम नहीं है। इन्हें टंकी में भरे ताजा पानी ही पीने को मिलता है। हालांकि शहर के स्कूलों में आरओ भी लगे हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों की स्थिति खराब है।
वहीं कुछ स्कूलों के भवन खंडहर हैं, जबकि कई जगह चहारदीवारी भी खराब हालत में है, इसकी भी मरम्मत की जरूरत है। इसके अतिरिक्त स्मार्ट शिक्षा व्यवस्था का सपना अभी भी दूर है, जिले के 40 फीसदी स्कूलों में अभी तक स्मार्ट बोर्ड नहीं हैं। जिन स्कूलों में हैं, वहां भी सभी कक्षाओं में नहीं हैं।
यहां कक्षाओं में दीवार पर पॉलिश करके बने ब्लैक बोर्ड से पढ़ाई कराई जा रही है। केवल मॉडल संस्कृति, पीएमश्री या प्रमुख विद्यालयों में ही यह सुविधा है। इसके अलावा जनरेटर या इन्वर्टर भी स्कूलों में नहीं हैं। ऐसे में बत्ती गुल होने पर विद्यार्थी गर्मी में पढ़ाई करते हैं। जिले में 776 राजकीय विद्यालय हैं, जहां पर करीब डेढ़ लाख विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। सभी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी कुछ न कुछ कमी जरूर है।
राजकीय विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के लिए हर साल करीब तीन करोड़ रुपये की राशि जारी होती है। बजट का 10 प्रतिशत केवल स्वच्छता और 70 फीसदी राशि विकास कार्यों यानी कमरे, शौचालय आदि दुरुस्त करने पर खर्च होती है। प्रत्येक स्कूल को छात्र संख्या के हिसाब से राशि जारी की गई है। इसमें छात्र संख्या के हिसाब से किसी को 10 हजार रुपये तो किसी को एक लाख रुपये तक मिलता है। स्कूल प्रबंधन शिक्षण सामग्री खरीदने और वार्षिक कार्यक्रम भी इसी राशि से करते हैं।
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18 विद्यालयों में चहारदीवारी नई बनाने की जरूरत ः जीएसएसएस राहड़ा, पीएमश्री जीएसएसएस मूनक, जीएसएसएस टिकरी, जीएसएसएस मोहिदिनपुर, जीएसएसएस शेखपुरा सोहाना, जीएसएसएस कोर माजरा, जीजीएसएसएस गोंदर में चाहरदिवारी नई बनाने की जरूरत है। जबकि जीएसएसएस खेड़ीसर्फअली, जीएसएसएस गंगटेहड़ी पोपड़ान, जीएसएसएस खानपुर, जीएसएसएस बीबीपुर जाटान, जीएसएसएस कलसौरा, जीएसएसएस नगला रोड़ान, जीएसएसएस डबकौली कलां, जीएसएसएस प्रेमनगर, जीएसएसएस शेखपुरा सोहाना, जीएसएसएस कोर माजरा और पीएमश्री जीएसएसएस सांभली की चहारदीवारी की ऊंचाई कम है, इसे बढ़ाने की मांग भी स्कूलों ने विभाग को भेजी है।
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