- जिला न्यायवादी सहित 20 सरकारी वकील कर रहे काम, 11 की है कमी
राकेश चौहान
करनाल। जिला अदालत में सरकारी अधिवक्ताओं के 11 पद खाली हैं। जिसका सीधा असर केसों पर पड़ रहा है। एक अधिवक्ता दो-दो अदालतें देख रहा है। ऐसे में जब अधिवक्ता एक अदालत में जाता है तो दूसरी में उसे तारीख लेनी पड़ती है। इस कारण केसों में तारीख पर तारीख मिल रही हैं।
सरकारी अधिवक्ताओं की कमी के कारण अधिकतर केसों की पैरवी नहीं हो पा रही है। इस कारण कोर्ट में हजारों केस लंबित हैं। जिला अदालत में एक सेशन जज और नौ अतिरिक्त सेशन जज की अदालतें हैं। इन 10 अदालतों पर एक जिला न्यायवादी और पांच उप जिला न्यायवादी हैं। ऐसे में चार सरकारी वकीलों के पद खाली हैं। इससे अलग जिला अदालत में 19 लोअर डिवीजन कोर्ट हैं। इन अदालतों में 14 सहायक जिला न्यायवादी हैं। यहां भी पांच पद सरकारी वकीलों के खाली हैं। यह हालात जिला अदालत के हैं। जहां 29 अदालतों में 20 सरकारी वकील हैं। नौ सरकारी वकीलों की कमी है। एक अदालत पर एक सरकारी वकील की आवश्यकता है।
एक वकील के भरोसे तीन अदालतें
सबसे ज्यादा खराब हालत असंध सब डिवीजन अदालत में है। जहां तीन अदालते हैं लेकिन वहां एक ही सरकारी वकील है। ऐसे में एक सरकारी वकील किस-किस अदालत में जाकर केस की पैरवी करे। हालांकि इंद्री सब डिवीजन अदालत में सरकारी अधिवक्ताओं की कमी नहीं है। वहां दो अदालतें हैं और दो सरकारी वकील हैं।
सरकारी अधिवक्ताओं की कमी का फायदा आरोपी पक्ष को हो रहा है क्योंकि वकीलों की कमी से जिन केसों में तारीख पर तारीख मिल रही है। उन मामलों में आरोपी पक्ष को समय मिल रहा है। वह मौज कर रहे हैं। उनका केस लंबा चलता है तो केस की सही तरीके से पैरवी नहीं हो पाती।
जिले में हैं जीआरपी सहित 20 थाने
जिले में 19 थाने व 14 चौकियां हैं। इनमें दो महिला और एक हाईवे और एक साइबर क्राइम थाना शामिल है। शहर की बात करें तो सिटी, सिविल लाइन, सदर, रामनगर, सेक्टर-32,33, महिला थाना, साइबर क्राइम थाना है। इससे अलग असंध में असंध व महिला थाना है। इनसे अलग घरौंडा, बुटाना, इंद्री, कुंजपुरा, मधुबन, निगदू, निसिंग, तरावड़ी, मूनक थाना है। इन थानों में सदर बाजार, सेक्टर-4, सेक्टर-13, सेक्टर-9, मॉडल टाउन, जुंडला, रंबा, नीलोखेड़ी, बयाना, जलमाना, बल्ला, सालवन, सीतामाई व मंगलौरा चौकी है। इससे अलग जीआरपी थाना भी है।
हर साल दर्ज होते हैं साढ़े ग्यारह हजार से अधिक मामले
जिले के थानों में हर साल दर्ज होने वाले मामलों की बात करें तो उनकी संख्या साढ़े ग्यारह हजार से अधिक है। जनवरी 2024 से अभी तक जिले के थानों में 5700 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। वहीं पिछले वर्ष 2023 की बात करें तो 11607 से अधिक मामले दर्ज थे। 2022 में 11244 से अधिक मामले दर्ज थे। यदि 2021 की बात करें तो 10015 एफआईआर दर्ज की गई थी। ऐसे ही हर रोज औसतन 30 के करीब मामले दर्ज हो रहे हैं।
केस-1
अशोक नगर निवासी देवेंद्र ने बताया कि उसका कोर्ट में झगड़े का मामला चल रहा है। लंबे समय से केस में तारीख पर तारीख मिल रही है। अभी तक फैसला नहीं आया है।
केस-2
रामनगर निवासी तरण सिंह ने बताया कि उसका झगड़े का मामला चल रहा है। जिसमें लंबे समय से तारीख पर तारीख मिल रही है।
जिले में अदालतों की संख्या के अनुसार सरकारी वकीलों की कमी है फिर भी हमारे वकील केसों में कड़ी मेहनत और लगन से पैरवी कर रहे हैं। मामलों में दोषियों को सजा भी दिला रहे हैं। वकीलों की कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को पत्र भेजा गया है। उम्मीद है जल्द सरकारी वकीलों की कमी दूर हो जाएगी।
- डॉ. पंकज सैनी, जिला न्यायवादी करनाल