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Karnal News: अभियान शुरू, नगर निगम ने पकड़े 57 बंदर

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। शहरवासियों को बंदरों के उत्पाद से अब निजात मिलने की संभावना है, क्योंकि नवागत निगमायुक्त नीरज कादियान ने कार्यभार संभालने के दूसरे ही दिन शहर में बंदरों को पकड़ने का कार्य शुरू किया गया। विशेषज्ञों की टीम ने बुधवार को सेक्टर-9, फूसगढ़, प्रेम नगर, गुड़ मंडी, रेलवे स्टेशन तथा पाल नगर जैसे क्षेत्रों से करीब 57 बंदरों को पकड़ा। इनमें से 47 बंदरों को कलेसर के जंगल में छोड़ा गया है।
शहर में बंदरों की समस्या लंबे समय से है, जिससे लोग काफी परेशान हैं। कई बार बंदरों को पकड़ने की मांग पार्षदों की ओर से निगम के सदन में भी रखी गई लेकिन नगर निगम हर बार सिर्फ आश्वासन देता रहा। तीन साल पहले एक बार अभियान शुरू भी किया तो बीच में ही वह संस्था कार्य छोड़कर चली गई थी। अब एक बार फिर निगम ने नई संस्था के साथ अनुबंध करके बंदरों को पकड़ने का कार्य शुरू कराया है।
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नगर निगम आयुक्त नीरज कादियान ने बताया कि नागरिकों को उत्पाती बंदरों से निजात दिलाने के लिए नगर निगम गंभीरता से कार्य कर रहा है। पकड़े गए सभी बंदरों को पशुपालन विभाग से मेडिकल करवाने के उपरांत जंगल में छोड़ा गया है। बंदर पकड़ने का कार्य नियम व शर्तों के तहत किया जा रहा है। सभी बंदरों के पकड़े जाने तक यह अभियान चलाया जाएगा।
बुधवार को वार्ड 20 में काछवा रोड स्थित सीएसएसआरआई के सामने मंदिर के पास भी पिंजरे लगाए गए थे और यहां भी दोपहर तक करीब 10 बंदरों को पकड़ा जा चुका है। जिस क्षेत्र से शिकायत प्राप्त होती हैं, वहीं पर पिंजरा लगाकर बंदरों को पकड़ा जा रहा है। यदि किसी क्षेत्र में बंदर ज्यादा हैं, तो वह एजेंसी के संपर्क नंबर 9690402290 तथा नगर निगम के टोल फ्री नम्बर 18001802700 पर सूचना दे सकते हैं।
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क्या हैं नियम
निगमायुक्त ने बताया कि बंदरों को एनिमल बोर्ड ऑफ इंडिया के मानदंडों के अनुसार ही पकड़ा जाएगा। पकड़े गए सभी बंदरों को कलेसर के जंगल में छोड़ना होगा। संबंधित एजेंसी को नियम कानूनों व आदेशों का पालन करना अनिवार्य होगा। इन्हें पकड़ते समय किसी भी प्रकार की क्रूरता व निर्दयता नहीं बरती जाएगी। पिंजरा व अन्य सभी उपकरण संबंधित एजेंसी के होंगे। उनके पिंजरे में खाने की चीजें जैसे चना, गुड़, मूंगफली, फल व अन्य खाद्य पदार्थ एजेंसी को ही उपलब्ध करवाने होंगे। कर्मचारी प्रशिक्षित होने चाहिए। बंदरों को पशु चिकित्सक अस्पताल से मेडिकल करवाना अनिवार्य रहेगा। किसी भी नशीली वस्तु व दवा का प्रयोग करने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा और न ही भोजन में ऐसा कोई पदार्थ दिया जाएगा। एजेंसी अपने अधीन कर्मचारियों को सेफ्टी किट व फर्स्ट एड किट उपलब्ध करवाना सुनिश्चित करेगी। बंदरों को पकड़ने का कार्य संतोषजनक न पाए जाने पर एजेंसी का ठेका रद्द करने का पूर्ण अधिकार नगर निगम आयुक्त का रहेगा।
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