संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। महाशिवरात्रि पर्व के लिए संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय में व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है, जहां लाखों श्रद्धालुओं पहुंचने की संभावना है। इस बारशिवलिंग का महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन की तर्ज पर 35 किलो चांदी से शृंगार होगा।
25 और 26 फरवरी को दोनों दिन जलाभिषेक होगा। रात्रि साढ़े 11 बजे से साढ़े 12 तक भस्माभिषेक होगा। विशेष तैयारी करीब एक माह से चल रही है। यहां पार्किंग, भंडारे से लेकर तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उन्होंने कहा कि साल में चार रात्रि महत्वपूर्ण है। इनमें दीपावली रात्रि, होली रात्रि, दुर्गा अष्टमी की कालरात्रि और फागुन माह की महाशिवरात्रि शामिल है। महाशिवरात्रि पर स्थान पर पूजन का विशेष महत्व है। अरुणा, वरुणा और सरस्वती नदी का संगम होने से चलते यहां पांडवों ने भी तप किया था। इसका वर्णन शिव पुराण में दर्ज है। सेवादल के प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि लंगर भवन को तीन भागों में विभाजित किया गया है। इसमें एक हिस्सा संत महात्माओं के लिए रिजर्व रहेगा और दो में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे।
मेले में साढे तीन से चार लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद को देखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से तैयारी की गई है। ट्रैफिक को नियंत्रित करने के लिए आने और जाने का रूट अलग अलग होगा। अवस्थित ढंग से खड़े किए जाने वाले वाहनों को हटाने के लिए इस बार ट्रैफिक पुलिस क्रेन के साथ तैनात रहेगी। मेले की तैयारी को लेकर मेला परिसर में दुकानें और झूले लगने शुरू हो गए हैं।
सूर्य, बुध और शनि एक साथ कुंभ राशि में : श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर के पुरोहितों के मुताबिक इस बार महाशिवरात्रि पर सूर्य, बुध और शनि एक साथ कुंभ राशि में रहेंगे। तीनों ग्रहों की युति और महाशिवरात्रि का योग 2025 से पहले 1965 में बना था। इस साल महाशिवरात्रि पर शिव के साथ सूर्य, बुध और शनि ग्रह की विशेष पूजा का भी शुभ योग है। इस योग में की गई पूजा और पाठ से कुंडली से जुड़े ग्रह दोष शांत होते हैं। श्रीमहंत पुरी का स्वागत : प्रयागराज महाकुंभ से श्रीमहंत बनकर लौटे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव रविंद्र पुरी का संगमेश्वर महादेव मंदिर में अभिनंदन किया। मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी के सानिध्य मंदिर के ब्राह्मण और समस्त सेवा दल और श्रद्धालुओं ने श्री महंत रविंद्र पुरी को माला पहनाई। इस दौरान उन्होंने व्यवस्थापक, प्रबंधकों एवं सेवादल अधिकारियों को निर्देश दिए कि श्रद्धालुओं को सभी तरह की सुविधा यहां मिलनी चाहिए।