जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से उनकी मांगों को लेकर बल्ला में दिया जाने वाला शांतिपूर्वक धरना सातवें दिन में प्रवेश कर गया। समिति सदस्यों ने निर्णय लिया कि उनका धरना अपनी मांगों को लेकर जारी रहेगा, लेकिन धरनों पर रहते हुए जनहित का कार्य करेंगे।
इसी कड़ी में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों की ओर से सामूहिक तौर पर रक्तदान किया जाएगा। प्रदर्शनस्थलों पर अधिक से अधिक भीड़ जुटाने के लिए गांव दर गांव टीम भेजकर धरनास्थल पर पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाएगा। उधर, बल्ला पुलिस चौकी और असंध थाने में पुलिस बल तैनात है, साथ ही पुलिस पल पल की जानकारी ले रही है। रायपुर जाटान के बलजीत सिंह चहल की अगुवाई में चल रहे धरने के सातवें दिन हरियाणा सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश झिंडा ने ऐलान किया कि सिख समुदाय के लोग भी आपके साथ कंधा से कंधा मिलाकर चलेंगे। अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए सहयोग करेंगे। अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए समाज के अधिक से अधिक लोगों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के जिला प्रधान नफे सिंह मान ने कहा कि समाज की अन्य बिरादरियों की ओर से धरनास्थल पर पहुंचकर उन्हें समर्थन दिया जा रहा है इससे समाज के आपसी भाई-चारे की मिशाल पेश होती है। समिति के सदस्य बलवान सिंह मान ने कहा कि धरने के माध्यम से समुदाए के लोग अपनी मांग जारी रखेंगे, लेकिन सामाजिक कार्यों को गति प्रदान करने वाले कार्य भी करेंगे। शीघ्र ही अन्य मेंबरों की बैठक बुलाकर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के सैंकड़ों सदस्य सामुहिक तौर पर रक्तदान करने की तारीख का ऐलान किया जाएगा।
इनमें गगसीना गांव से ईश्वर सिंह कश्यप, राजबीर प्रजापत, रामनिवास बादी, राजपाल बादी, रणपाल हरिजन, रोहताश हरिजन, बागा मिराशी व सतबीर सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने पहुंचकर धरने को अपना समर्थन देने की घोषणा की। खोराखेड़ी गांव से पहुंचे राजबीर कश्यप, मोरमाजरा के जयप्रकाश शर्मा, सुभाष शर्मा व फतेहर सिंह जोगी सहित बल्ला के कृष्ण प्रजापत, जगदीश जांगड़ा, मंगंत प्रजापत, व गंगादत्त शर्मा सहित अन्य धरने में शामिल हुए। गगसीना गांव से रघबीर सिंह एंड पार्टी की ओर से रागनियों का समां बांधा गया। धरनास्थल पर लंगर चलाया जा रहा है।
जाट महासभा, करनाल की ओर से 21 हजार रुपए, बल्ला की भोजाण पट्टी की ओर से 31 हजार एवं रामकरण पट्टी की ओर से 30 हजार रुपये का चंदा देने की घोषणा की गई। 29 जनवरी को जाटों के आंदोलन शुरू होने से पूर्व ही मूनक हेड पर सुरक्षा बढ़ा दी थी।