- तकनीकी अड़चनों से लंबित मामलों में नहीं हुआ समाधान, कराधान विभाग ने सुधार को चलाया अभियान, एसोसिएशन ने उठाई साधारण ओटीएस की मांग
- कई फर्मों ने बंद होने के कारण नहीं भरा कर, अब तक बकाया पर लग चुका भारी भरकम ब्याज और जुर्माना
- जनवरी माह में आई ओटीएस में निपटे चुनिंदा मामले
- बिना फार्म आर्डर वाले उद्यमी नहीं उठा पाए थे लाभ
गगन तलवार
करनाल। देश में वैट खत्म हुए सात साल बीत चुके हैं, लेकिन प्रदेश में उस जमाने के कर से जुड़े वर्षों पुराने मामले आज भी लंबित हैं। जिनके कर पर जुर्माना और ब्याज लगने के बाद अब यह भारी भरकम राशि हो चुकी। लंबित मामलों पर नजर डालें तो हरियाणा के कारोबारियों पर करीब 19 हजार करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। इनमें से करनाल के व्यापारियों पर कराधान विभाग का करीब पांच हजार करोड़ रुपये बकाया चल रहा है।
इधर, कराधान विभाग की ओर से भी कई बार सख्ती के बाद यह राशि जमा नहीं हुई तो अब विभाग ने भी लंबित मामलों को निपटाने के उद्देश्य से इनमें सुधार व पुनर्मूल्यांकन का अभियान चलाया है। इसके तहत 31 जुलाई तक मामलों पर सुनवाई करते हुए उनके फार्म भी लिए जा रहे हैं। वहीं कारोबारियों और कर बार एसोसिएशन ने सरकार से एक बार फिर ओटीएस यानी वन टाइम सेटलमेंट स्कीम शुरू करने की मांग की है। ताकि जो उद्यमी पिछली ओटीएस में लाभ नहीं उठा पाए, वे इस बार छूट का लाभ ले सकें।
एसोसिएशन का कहना है कि जनवरी माह में सरकार जो ओटीएस लाई थी, उसमें केवल उन कारोबारियों को ही लाभ मिल पाया था, जिनके फार्म दिसंबर 2023 से पहले जमा थे और अधिकारियों की ओर से आर्डर भी जारी हो चुके थे। जिन कारोबारियों के फार्म आर्डर नहीं थे, उन्हें छूट नहीं मिली, इसलिए अभी तक वैट के मामले लंबित होने के साथ कर की राशि भी बकाया है। जुलाई 2017 में केंद्र सरकार ने वैट को खत्म कर दिया था। व्यापारियों एवं अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2016-17 तक के केसों में इनपुट मैच न होने के कारण और वैट के फार्म जमा न करवाने के कारण कर पर ब्याज और जुर्माना लगा था। ब्यूरो
देना पड़ता है ज्यादा टैक्स
व्यापारी को माल दो प्रतिशत टैक्स पर बेचने के लिए दूसरे व्यापारी से सी फॉर्म लेकर कराधान विभाग को जमा करना होता है। यह फार्म विभाग की तरफ से दो पार्टियों के लेन-देन के आधार पर जारी किया जाता है। इसके अनुसार ही व्यापारी कर जमा करवाता है। जो सी-फार्म देते हैं उस माल पर दो प्रतिशत कर लगता है और जो सी-फार्म नहीं देते उस माल पर 13.125 प्रतिशत टैक्स देना होता है। इसी पर अब ब्याज और जुर्माना राशि जुड़ी है।
अब कराधान विभाग की ओर से जो अभियान चलाया है, यह व्यापारियों के लिए अच्छा कदम है। सरकार को दोबारा ओटीएस लाकर व्यापारियों को राहत देनी चाहिए। यदि अब मामले पर समाधान होता है तो भविष्य में राहत मिलेगी। सरकार नई ओटीएस में भी शर्तें कम रखे, उद्यमी पुराने कर का भुगतान करने को तैयार हैं। बशर्तें ब्याज और जुर्माना माफ हो। - एडवोकेट संजय मदान, वाइस चेयरमैन, हरियाणा स्टेट टैक्स बार एसोसिएशन
अभियान के दौरान पूर्व के वर्षों की बकाया वसूली के मामलों पर सुनवाई होगी। इसमें सुधार, रिमांड मामलों का निर्णय और पुनर्मूल्यांकन आदि भी किया जा सकता है। जिन व्यापारियों एवं उद्यमियों के मामले लंबित हैं, वे इस अभियान का लाभ उठा सकते हैं।
- नीरज सिंह, उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त