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Karnal News: गेहूं की सात, जौ की एक नई किस्मों इजाद

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- सिंचित और सीमित सिंचाई के हिसाब से खोजी गई किस्में, इस वर्ष से किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे बीज
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माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। देश के अनुसंधान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों में चल रहे अनुसंधानों में इस वर्ष वैज्ञानिकों ने गेहूं की सात और जौ की एक नई किस्म इजाद की है। इन नई किस्मों की सिंचित एवं सीमित सिंचाई के हिसाब से अलग-अलग इजाद की गई है। दिल्ली, हिसार, करनाल और छत्तीसगढ़ में वैज्ञानिकों ने इन किस्मों की खोज की और अब इनका बीज किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा। भाकृअनुप-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की अगुवाई में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर (राजस्थान) में आयोजित 62वीं कार्यशाला में इन किस्मों की घोषणा की गई।
उत्तर पश्चिमी मैदानी भागों में सिंचित एवं समय से बुवाई के लिए गेहूं की एचडी 3386 किस्म की पहचान की गई। इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूजा दिल्ली की ओर से खोजा गया है। इसके साथ ही सीमित सिंचाई के साथ गेहूं की फसल के लिए डब्ल्यूएच 1402 की पहचान की गई। इसकी खोज हिसार कृषि विश्वविद्यालय की ओर से की गई है।
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उत्तर पूर्वी मैदानी भागों में सिंचित एवं समय से बुवाई के लिए गेहूं की एचडी 3388 किस्म की पहचान की गई। इसे भी भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूजा दिल्ली की ओर से खोजा गया है। मध्य क्षेत्र में सिंचित एवं समय से बुवाई के लिए गेहूं की सीजी 1040 इजाद की गई। इस किस्म की खोज छत्तीसगढ़ के वैज्ञानिकों ने की है। इसके साथ ही भाकृअनुप-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल की ओर से इजाद किया गया कर्ण शिवानी डीबीडब्ल्यू 327 की किस्म पर यहां बात की। इस नई किस्म का उच्च उर्वरता दशा के लिए क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है।
प्रायद्वीपीय क्षेत्र में सिंचित एवं समय से बुवाई के लिए गेहूं की किस्म एमपी 1378 की खोज मध्य प्रदेश के कृषि वैज्ञानिकों की है। सीमित सिंचाई के लिए डीबीडब्ल्यू 359 की इजाद की गई। इसे भी भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल ने इजाद किया है। उत्तर पश्चिमी मैदानी भागों में सिंचित एवं समय से बुवाई के लिए जौ की डीडब्ल्यूआरबी 219 की पहचान की गई। इसकी खोज भी भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल ने की है
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पांच नई किस्मों का होगा व्यवसायीकरण

इस वर्ष व्यवसायीकरण के लिए गेहूं की पांच नई किस्में डीबीडब्ल्यू-370, डीबीडब्ल्यू-371, डीबीडब्ल्यूए-372, डीबीडब्ल्यूए-316 और डीडीडब्ल्यू-55 का व्यवसायीकरण हो जाएगा। यह किस्में किसानों को उपलब्ध होंगी। यह सभी किस्में भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल ने खोजी हैं। संस्थान के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि आने वाले समय में संस्थान अपने अनुसंधान विकास और प्रचार कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों के लिए गेहूं और जौ के उत्पादन मूल्य संख्या में सुधारने के लिए निरंतर प्रयास करता रहेगा।
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