- पिता के गले लगकर बहन बोली- मेरी राखी चली गई, बिलखती पत्नी बोली- मेरा सब कुछ हो गया खत्म
- अंतिम संस्कार के समय मां भी हुई बेसुध, खड़े नहीं हो पा रहे थे दादा
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। महज सात दिन पहले भाई का सेहरा सजाने वाली बहन सृष्टि ने ले. विनय नरवाल को मुखाग्नि दी। जिस समय भाई के पार्थिव शरीर की परिक्रमा करके उसने मटकी तोड़ी तो वह फूट-फूटकर रोई। दाग लगाने के बाद वह अपने पिता के गले लग गई और बोली- मेरी तो राखी भी चली गई। भाई ने हर राखी पर मुझसे लाड लड़ाए हैं।
इधर, अंतिम दर्शन और संस्कार के समय बिलखते हुए पत्नी हिमांशी के मुंह से यही शब्द निकल रहे थे कि मेरा तो सब कुछ खत्म हो गया। अब मैं किसके सहारे जिंदगी काटूंगी। इसके अलावा अंतिम संस्कार के समय मां भी बेसुध हुई। दादा हवा सिंह भी अपने पैरों पर खड़े नहीं हो पा रहे थे। उन्हें भी परिवार के लोगों ने सहारा दिया। पिता राजेश भी परिवार को संभालने के साथ आंखों में आंसू लिए हाथ जोड़कर खड़े रहे। अभी तो परिवार ने शादी की खुशियां भी मिलकर नहीं बांटी थी कि आतंकियों की कायर हरकत के कारण बेटा उन्हें छोड़कर चला गया।
बिलखती रहीं बहन और पत्नी
अंतिम यात्रा के घर से शुरू होने के समय और अंतिम संस्कार के समय जवान की बहन सृष्टि और पत्नी हिमांशी चिल्लाती रही। उनके आंसू थम नहीं रहे थे। वे बस एक ही बात कह रहे थे विनय रुक जाओ, हम सब को यूं छोड़कर मत जाओ। इधर, बुजुर्ग दादी भी आंखों में आंसू लिए घर के गेट पर पोते को विदाई दे रही थी। अब तक यही दादी पोते से लाड लड़ती थी। 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों की गोली लगने से पत्नी हिमांशी के सामने पति विनय नरवाल की मौत हुई थी। सूचना मिलते ही मंगलवार को परिवार कश्मीर रवाना हो गया था। वहां पर पिता राजेश नरवाल, छोटी बहन सृष्टि, पत्नी हिमांशी स्वामी, सास पूनम स्वामी और ससुर सुनील दत्त पहुंचे। अस्पताल में उन्होंने अपने बेटे, भाई व दामाद का शव देखा। जिसके साथ ही वे हवाई मार्ग से दिल्ली तक और दिल्ली से करनाल तक एंबुलेंस में आए।