धान खरीद शुरू हुए एक पखवाड़ा बीत चुका है। 10 अक्टूबर तक 37.96 लाख क्विंटल धान जिले की सभी अनाज मंडियों में सभी एजेसियों के माध्यम से खरीदा गया है, लेकिन इसमें 72 घंटे के अंदर किसान को भुगतान करने के दावों की हवा निकल गई है। अभी तक किसी भी किसान को एक रुपया भुगतान नहीं मिला है। सरकार पर बकाया यह रकम 716 करोड़ रुपये है। इधर, हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन ने सात अरब से अधिक बकाया इस रकम पर विलंब के दिनों का ब्याज किसानों को देने की मांग की है।
केंद्र सरकार के आदेश पर जिले में 26 सितंबर से धान खरीद शुरू हुई थी। हालांकि तैयारी न होने के कारण पहले दिन खरीद नहीं की जा सकी, दूसरे दिन खरीद की रस्म अदायगी की गई। सरकार के इस आदेश से मिलर्स और आढ़ती भी तिलमिला गए। भले ही किसान का अनाज मंडियों में धान की खरीद न होने से बेहाल था लेकिन मिलर्स व आढ़ती भी नहीं चाहते थे कि खरीद एक अक्टूबर से पहले हो। क्योंकि अधिकांश आढ़ती और मिलर्स भी हैं, जिनके लिए 15 से 30 सितंबर का पखबाड़ा स्वर्णिम समय होता है, इसमें वह धान के बड़े मुनाफा वाले कारोबार के लिए महीन धान सस्ते में खरीदते हैं। यही कारण रहा कि कभी हड़ताल तो कभी किसान आंदोलन और खरीद एजेंसियों की आधी अधूरी तैयारी के बहाने खरीद को टाला जाता रहा।
फिलहाल जैसे-तैसे एजेंसियां मंडियों में उतरी और किसी तरह धान खरीद की। इसी बीच राइस मिलर्स भी हड़ताल तोड़कर वापस लौट आए। आढ़ती तो पहले ही हड़ताल खत्म कर चुके थे। मंडियों में लिफ्टिंग न होने, नमी अधिक बताकर सस्ते में धान खरीदने का खेल शुरू हो गया। जैसे तैसे धान की खरीद जिलेभर की अनाज मंडियों में 3796210 क्विंटल तक पहुंच गई। एमएसपी के भाव 1888 रुपये प्रति क्विंटल की दर से इसकी कीमत 716.72 करोड़ रुपये से भी अधिक है। ऐसा नहीं है कि हर किसान को धान बेचे अभी एक पखवाड़ा हो गया है लेकिन अधिकांश किसान ऐसे हैं, जिन्होंने एक सप्ताह के दौरान ही धान बेचा है। इसके पीछे मुख्य बजह सरकारी पोर्टल ई-खरीद का ठीक तरीके से संचालित न होना बताया जा रहा है, क्योंकि पोर्टल पर आई-फार्म ही जेनरेट नहीं हो रहा है, जब तक यह फार्म जेनरेट नहीं होगा, किसानों या आढ़तियों के खाते में भुगतान नहीं होगा। इस बकाया पर अब आढ़ती एसोसिएशन ब्याज देने की मांग करने लगी है।
-15 दिनों की खरीद में जिले में करीब 38 लाख क्विंटल धान सरकार ने खरीदा, लेकिन अभी तक एक रुपया भुगतान नहीं दिया। ई-खरीद पोर्टल से आढ़तियों के आई-फार्म ही तैयार नहीं हो रहे हैं। बिना आई-फार्म भुगतान नहीं आ सकता। यह स्थिति सिर्फ करनाल की नहीं पूरे राज्य की है। शासन तक लिखकर दिया है। मुख्यमंत्री के सामने भी बात रखी थी लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है। जिले में सात अरब रुपये से अधिक का भुगतान बकाया हो गया है, इस पर सरकार को किसानों को ब्याज देना चाहिए, जैसा कि सरकार ने पहले वादा किया था।
-रजनीश चौधरी, चेयरमैन हरियाणा राज्य अनाज मंडी आढ़ती एसोसिएशन