संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। परिवार पहचान पत्र न होने के कारण लोग चिरायु हरियाणा योजना के तहत इलाज कराने के लिए धक्के खा रहे हैं। जिले के 5.66 लाख लोगों ने चिरायु कार्ड बनवाएं हैं, लेकिन इनमें से महज 11 हजार 649 लोगों ने ही अपना इलाज कराया है। इसी को लेकर कुछ दिन पहले आयुष्मान हरियाणा की एक टीम ने करनाल में स्वास्थ्य विभाग और सिविल अस्पताल का निरीक्षण किया था। जिसमें उन्होंने अधिकारियों व कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा चिरायु कार्ड के अंतर्गत लोगों को इलाज मुहैया कराने का निर्देश दिया था।
पंजीकरण कक्ष इंचार्ज सूबे सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के पंजीकरण के लिए परिवार पहचान पत्र को अनिवार्य किया है, क्योंकि इससे पंजीकरण कराने पर मरीज के बारे में पता लग जाता है कि उसका चिरायु कार्ड बना है या नहीं। जिसके बाद अगर मरीज का कार्ड बना होता है तो उसे अस्पताल के पंजीकरण कक्ष में लगने वाले पांच रुपये नहीं देने पड़ते, लेकिन अस्पताल में दो हजार की ओपीडी में से मात्र 20 से 25 लोग ही परिवार पहचान पत्र लेकर आते हैं। ऐसे में उन्हें मोबाइल नंबर के माध्यम से ही पंजीकरण करना पड़ता है, क्योंकि वे किसी मरीज का पंजीकरण रोक नहीं सकते।
कर रहे जागरूक पंजीकरण कक्ष से कश्मीर सिंह व रेखा शर्मा ने बताया कि अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले लोगों को वे स्वयं परिवार पहचान पत्र के प्रति जागरूक कर रहे हैं कि अगली बार परिवार पहचान पत्र लेकर आएं ताकि उनका चिरायु योजना में नाम आने पर इलाज करवाया जा सके। सिविल अस्पताल के पंजीकरण कक्ष में कुल पांच कर्मी तैनात हैं। जिनमें सोनिया, रीना, सिमरन, रेखा शर्मा व कश्मीर सिंह शामिल हैं।
क्या है चिरायु योजना
चिरायु योजना हरियाणा सरकार की फ्लैगशिप स्कीम है। इस योजना के अंतर्गत 1.80 लाख रुपये तक की आय वाले परिवारों को इस योजना में शामिल किया गया है। जिनके चिरायु हरियाणा नाम से कार्ड बनाए जा रहे हैं। इससे उनके परिवार का कोई भी सदस्य पांच लाख रुपये तक का इलाज निशुल्क करवा सकता है। जिले में अब तक 5 लाख 66 हजार 308 चिरायु कार्ड बनाए जा चुके हैं। हाल में 87 हजार 176 नए पात्रों को इस सूची में जोड़ा गया है। अब कुल सात लाख 64 हजार 676 चिरायु कार्ड बनाए जाने हैं। विभाग की ओर से चिरायु कार्ड बनाने का कार्य निरंतर जारी है। गांव और शहर दोनों जगह कैंप आयोजित किए जा रहे हैं। जिन परिवारों ने चिरायु हरियाणा कार्ड नहीं बनवाएं हैं, उनकी सूची तैयार कर आशा वर्कर के माध्यम से घर-घर जाकर सूचना पहुंचाई जा रही ह।