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Karnal News: वैज्ञानिक व अधिकारी जाएंगे किसानों के द्वार, मांग के अनुसार करेंगे शोध

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1003 डॉ.रतन तिवारी
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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। अगले माह एक बार फिर करनाल के अनुसंधान संस्थानों सहित देशभर के वैज्ञानिक किसानों के द्वार जाएंगे। केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने रबी फसल के लिए विकसित कृषि संकल्प अभियान की तिथि तीन से 18 अक्तूबर तक तय कर दी है। इस बार इस अभियान में रबी की फसलों की पैदावार को बढ़ाने के साथ-साथ लागत घटाकर किसानों का मुनाफा बढ़ाने, खाद, पानी और दवाओं के जरूरत के अनुसार उपयोग के जुड़ाव और विकसित की गई तकनीक को साझा किया जाएगा। साथ ही किसानों के जरूरतों को एकत्र किया जाएगा, ताकि मांग पर आधारित शोध किया जा सके।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने बताया कि पिछले दिनों 29 मई से 12 जून तक खरीफ फसल का विकसित कृषि संकल्प अभियान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर चलाया गया था, जिसमें देश के 65 हजार गांवों के करीब 1.5 करोड़ किसानों तक वैज्ञानिकों, कृषि व अन्य संबंधित अधिकारियों की टीमें पहुंची थी। अब एक बार फिर तीन से 18 अक्तूबर तक रबी फसलों का विकसित कृषि संकल्प अभियान चलाया जाएगा। रबी फसलों में मुख्यत: गेहूं जौं, सरसों, चना आदि की फसलें आती हैं।
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उन्होंने बताया कि आईआईडब्ल्यूबीआर, एनडीआरआई, सीएसएसआरआई, आईएआरआई, गन्ना प्रजनन संस्थान, एनबीएजीआर जैसे करनाल के संस्थानों के साथ-साथ देशभर के कई संस्थानों के वैज्ञानिक, कृषि और तकनीकी अधिकारी किसानों तक पहुंचेंगे। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से तिथि तय कर दी गई है, विस्तृत कार्ययोजना भी शीघ्र प्राप्त हो जाएगी। अब किसानों से सीधे मिलकर हर क्षेत्र की अलग-अलग चुनौतियां सामने आ रही हैं। किस क्षेत्र में क्या समस्याएं हैं, क्या चुनौतियां हैं, कहां किस तरह की किस्में चाहिए, कितना खाद, पानी और दवाएं डालनी है, ये सभी जानकारी हासिल होने के बाद फिर कार्ययोजना तैयार करके लागू की जाएगी, उसी आधार पर शोध कार्य आगे बढ़ेंगे।
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