संवाद न्यूज एजेंसी
घरौंडा। बसताड़ा गांव में सरफेस स्प्रेडर एवं मल्चिंग मशीन से किसान जसमेर सिंह द्वारा लगाए गए गेहूं के प्रदर्शन प्लांट को देखने के लिए विश्व खाद्य संगठन नई दिल्ली कार्यालय से विशेषज्ञ वैज्ञानिक डॉ अशोक यादव ने टीम के साथ दौरा किया।
किसान जसमेर सिंह ने डॉ. अशोक यादव से बातचीत करते हुए बताया कि उनका गेहूं की बिजाई पर केवल एक हजार रुपए प्रति एकड़ डीजल का खर्च ही आया है तथा गेहूं का जमाव गेहूं के खेतों जैसा ही है। खेती विरासत मिशन के प्रतिनिधि रमेश सिंह ने बताया कि इस प्रदर्शन प्लांट में 10 नवंबर को बिजाई की गई थी। खेती विरासत मिशन ने जिला करनाल में उपरोक्त विधि से कई गांव में प्रदर्शन प्लांट लगाए हुए हैं।
डॉ. अशोक यादव ने किसानों से बातचीत करते हुए बताया कि उपरोक्त विधि को अपनाने से गेहूं की फसल की बीजाई पर बहुत कम खर्च आता है जबकि फसल अवशेष खेत में रहने से भूमि की उर्वरा शक्ति बहुत तेजी से बढ़ती है। हमारे हरियाणा प्रदेश की 70 प्रतिशत भूमि में जैविक कार्बन न्यूनतम स्तर पर है।
उन्होंने बताया कि धान के अवशेषों में जीरो टिलेज हैप्पी सीडर मशीन अथवा सरफेस स्प्रेडर मशीन से लगातार बिजाई करने वाले किसानों के खेतों में जैविक कार्बन की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। हरियाणा विज्ञान मंच के राज्य कमेटी सदस्य डॉ. राजेंद्र सिंह ने बताया कि मंच फसल विविधीकरण, जल संरक्षण व फसल अवशेष प्रबंधन पर वर्ष 2017 से लगातार जन अभियान चला रहा है। मंच वर्ष 2022 से किसानों के खेतों पर गेहूं के अवशेषों में मूंग की बिजाई के प्रदर्शन प्लांट लगाता आ रहा है जिसके उत्साह जनक परिणाम आए हैं।
डॉ. अशोक यादव ने अपनी टीम के साथ बसताड़ा में सुरेंद्र कुमार के द्वारा प्राकृतिक विधि से तैयार न्यूट्रिटिव किचन गार्डनिंग का निरीक्षण किया। इस अवसर पर देशराज अलावला, सुरेंद्र कुमार बसताड़ा, वेदपाल, बलिंदर सिंह, रविंद्र सिंह, दीपू मौजूद रहे।