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चालान पर भी नहीं सुधर रहे स्कूल संचालक

Sat, 17 Sep 2016 01:06 AM IST
ब्यूरो/करनाल,अमर उजाला
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नौनिहालों को ढोने वाले स्कूली वाहन नियमों पर खरे नहीं उतर रहे। आरटीए और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूल संचालकों को ट्रैफिक नियमों के नोटिस भेजे जाते हैं, इसके बावजूद न तो स्कूलों को विभागों की परवाह है और न ही बच्चों की जान की। आलम यह है कि जिले के स्कूलों में चल रहे करीब साढ़े नौ सौ स्कूली वाहनों में से अब तक 56 के चालान किए जा चुके हैं। हर माह औसतन छह स्कूली वाहनों के चालान किए जा रहे हैं।
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 अधिकतर वाहन यातायात नियमों का पूर्ण रूप से पालन नहीं कर रहे हैं। किसी में अग्निशमन यंत्र नहीं है तो किसी में फर्स्ट एड बॉक्स नहीं है। क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाया जाना तो आम बात है। इसी के साथ थ्री-व्हीलर और टाटा मैजिक में स्कूली छात्रों को सफर करते हर रोज देखा जा सकता है। जिले में स्कूली वाहनों के कई हादसे हो चुके हैं। 30 अगस्त को भी गांव नसीरपुर में स्कूली बस के नीचे आने से नर्सरी की चार वर्षीय छात्रा परी की मौत हो गई थी।

स्कूल बस बच्ची को उसके घर नसीरपुर छोड़ने गई थी, जब वह बस से उतर रही थी तो अचानक चालक ने बस चला दी थी। इससे बच्ची बस के टायर के नीचे आ गई और मौके पर ही मौत हो गई थी। दो माह पूर्व ही घरौंडा के पास हुए बाइक और स्कूली वाहन की टक्कर में गाड़ी सवार छात्र भव्य की मौत हो गई थी। इससे पहले एक अन्य हादसे में भी अटल पार्क के पास स्कूल बस गलत साइड से आने के कारण एक कार से टकरा गई थी। इसमें कार सवार युवती को चोट आई थी। इसी प्रकार कई अन्य हादसे भी हुए हैं।
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क्या हैं स्कूली वाहनों के लिए नियम
1. स्कूल बस चालक को पांच वर्ष का भारी वाहन चलाने का अनुभव होना जरूरी है। पिछले पांच वर्षों में उस पर कोई केस दर्ज न हो।
2. चालक के साथ-साथ एक अन्य व्यक्ति भी मोटर वाहन के नियम 17 के तहत बस में साथ रहेगा।
3. स्कूल बस के आगे व पीछे स्कूल का नाम और स्कूल संचालक का फोन नंबर लिखा होना चाहिए।
4. बस के अंदर फर्स्ट एड किट, स्पीड गवर्नर और अग्निशमन यंत्र लगा होना जरूरी है।
5. सभी स्कूल बसों का वार्षिक फिटनेस प्रमाण पत्र और बीमा होना चाहिए।
6. बस चालक और परिचालक वर्दी में होना चाहिए और दोनों की नेमप्लेट पर लाइसेंस नंबर होना चाहिए।
7. सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगे होने चाहिए
8. स्कूली वाहनों में पुलिस, फायर ब्रिगेड, महिला हेल्पलाइन के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन का नंबर लिखा होना चाहिए।
9. स्कूली बसों की गति सीमा 50 किमी से अधिक नही होनी चाहिए।
10. लड़कियों की बसों में महिला हेल्पर होना जरूरी है।
11. स्कूल बसों पर रूट संख्या और समय लिखा होना चाहिए।

जिले में कितने स्कूली वाहन
वाहन    संख्या
बस (52-56 सीट)    250
मिनी बस (40-42 सीट)    300
वैन (27-32 सीट)    200
छोटी गाड़ियां (12-15 सीट)    200

समय-समय पर स्कूल संचालकों को हिदायतें दी जाती हैं कि वह स्कूली वाहनों में यातायात संबंधी किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरते। समय-समय पर बैठक लेकर नियमों के प्रति जागरूक किया जाता है। स्कूल प्रबंधन को इस बारे में गंभीर होना चाहिए, साथ ही अभिभावक भी इन पर नजर रखें।
- सुरेश गौरिया, जिला शिक्षा अधिकारी, करनाल
वर्जन
यातायात नियमों को तोड़ने वाले स्कूली वाहन चालकों के चालान किए जाते हैं। समय-समय पर वाहनों की चेकिंग भी की जाती है, ताकि स्कूली बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जा सके। भविष्य में भी स्कूली वाहनों की चेकिंग जारी रहेगी।
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-प्रधुमन सिंह, सचिव, आरटीए, करनाल
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