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Karnal News: ग्रामीण महिलाओं ने क्रोशिए को बनाया रोजगार का जरिया

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करनाल। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं अब पारंपरिक क्रोशिए की कला को आमदनी का जरिया बना रही हैं। घर के कामकाज के साथ समय निकालकर महिलाएं ऊन और धागे से टोपी, मफलर, स्वेटर, बच्चों के कपड़े समेत कई तरह की वस्तुएं तैयार कर रही हैं। सर्दी का मौसम शुरू होने से करीब दो माह पहले ही इन महिलाओं ने ऊनी सामान तैयार करना शुरू कर दिया है, ताकि समय पर ऑर्डर पूरे किए जा सकें।
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इसके साथ ही क्रोशिए से चाबी छल्ले, हेयर क्लिप, मोबाइल कवर, छोटे पर्स और सजावटी सामान भी तैयार किए जा रहे हैं। महिलाओं ने बताया कि पहले क्रोशिए से सामान बनाना उनका पारंपरिक हुनर था और वे इसका इस्तेमाल ज्यादातर घर के लिए कपड़े या सजावटी वस्तुएं बनाने में करती थीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें हुनर को उत्पाद के रूप में तैयार कर बेचने और ऑर्डर पर सामान बनाने का अवसर मिला। छोटे सामान जल्दी तैयार हो जाते हैं, जबकि स्वेटर, शॉल और अन्य ऊनी परिधानों में कई घंटे से लेकर कई दिन तक का समय लग जाता है।
शौक को आर्थिक आय के साधन में बदला
चिड़ाव गांव की नीलम ने बताया कि वह दो साल से समूह से जुड़ कर क्रोशिया का काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से क्रोशिया से सजावटी सामान बनाने का शाैक रहा है लेकिन शादी के बाद शौक को आर्थिक आय का मजबूत साधन बनाया। वह वर्तमान में ऑर्डर पर ही उत्पादों को तैयार कर ही हैं। ऐसे में इस समय चलन में ऊन से हेयर बैंड बनाना, मोबाइल कवर और चाबी के छल्ले सहित टोपियां व अन्य वस्त्र भी बनाती हैं।
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ऑर्डर पर तैयार कर ही उत्पाद
चिड़ाव गांव की रीना देवी ने बताया कि वह स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद क्रोशिए के काम को ज्यादा व्यवस्थित तरीके से करने लगी। पहले घर के लिए ही सामान बनाती थी, लेकिन अब लोगों के ऑर्डर भी तैयार करती हैं। वह बताती है कि ग्राहक जिस रंग या डिजाइन में सामान चाहते हैं, उसी के अनुसार तैयार करती हैं। हर माह तीन से चार हजार रुपये आमदनी प्राप्त कर रही हैं।
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