करनाल। स्नातक प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए शुरुआत में भले ही मारामारी रही हो, लेकिन कॉलेजों में सीटों से दोगुने आवेदन के बावजूद आधी से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। यह हालात भी तब हैं, जब चार चरण में दाखिला प्रक्रिया चली। कॉलेजों में सीटें खाली रहने के कारण प्रबंधन भी चिंता में हैं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो ग्रामीण कॉलेजों के हालात खराब हैं, इनमें 84 प्रतिशत तक सीटें रिक्त हैं। जबकि शहर के कॉलेजों में भी शत प्रतिशत दाखिले नहीं हो पाए। यहां भी आठ से 12 प्रतिशत तक सीटें रिक्त हैं। सरकारी संस्थानों में पंडित चिरंजीलाल शर्मा राजकीय पीजी कॉलेज में 92 प्रतिशत और करनाल के महिला पीजी कॉलेज में ही सर्वाधिक 88 प्रतिशत तक दाखिले हुए हैं। वहीं असंध, तरावड़ी, बसताड़ा और मटकमाजरी को छोड़ दें तो कोई भी राजकीय संस्थान 50 प्रतिशत सीटें नहीं भर पाया है।
उच्चतर शिक्षा निदेशालय ने एक बार और मौका देते हुए पोर्टल खोल दिया है। 14 अगस्त तक आवेदन से छूटे विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं और संस्थान भी रोजाना ओपन काउंसलिंग करके दाखिले दे सकेंगे। करीब पांच दिन बाद कॉलेजों की मांग पर यह अवसर दिया गया है।
तीन जून से दाखिला प्रक्रिया जारी है। ओवरऑल स्थिति देखें तो 11 राजकीय कॉलेजों में 5835 स्नातक प्रथम वर्ष की सीटें हैं, इनमें से 2039 यानी 35 फीसदी सीटें रिक्त हैं। दो चरण की मेधा सूची और दो चरण की लेट फीस के साथ ओपन काउंसलिंग के बाद भी इन सीटों पर दाखिले के लिए विद्यार्थी संस्थानों को नहीं मिले। ऐसे में अब इन्हें भरना संस्थानों के लिए चुनौती रहेगी। इस बार 18806 विद्यार्थियों ने 12वीं की परीक्षा पास की थी।
यह है कॉलेजों में सीटों की स्थिति
कॉलेज
सीटें
रिक्त
प्रतिशत
राजकीय कॉलेज निगदू
240
200
84 %
राजकीय महिला कॉलेज दादूपुर
260
214
82 %
राजकीय कॉलेज घरौंडा
520
411
79 %
राजकीय महिला कॉलेज बस्तली
240
177
74 %
राजकीय महिला कॉलेज पाढ़ा
240
156
64 %
राजकीय कॉलेज मटक माजरी
745
347
47 %
राजकीय महिला कॉलेज बसताड़ा
260
105
40 %
राजकीय कॉलेज तरावड़ी
300
110
37 %
राजकीय कॉलेज असंध
320
67
21 %
राजकीय महिला कॉलेज करनाल
960
116
12 %
राजकीय पीजी कॉलेज करनाल
1750
136
08 %
वर्जन
रिक्त सीटों को भरने के लिए विभाग ने एक अवसर और दिया है। विद्यार्थी 14 अगस्त तक होने वाली ओपन काउंसलिंग में हिस्सा लेते हुए दाखिला ले सकते हैं।
- डॉ. रेखा त्यागी, प्रिंसिपल, राजकीय पीजी कॉलेज
वर्जन
हमारे संस्थान में करीब 64 प्रतिशत सीटें रिक्त हैं। पिछली बार से दाखिले कुछ ज्यादा हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के जो विद्यार्थी दाखिला नहीं ले पाए, उन्हें प्रेरित करेंगे।
- डॉ. चमन लाल, प्रिंसिपल, राजकीय कन्या महाविद्यालय पाढ़ा