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Karnal News: भाजपा की जीत में अहम रही बिरादरियों की भूमिकाऊ

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देव शर्मा
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करनाल। भले ही सियासी दल जातपात से ऊपर उठकर चुनाव लड़ने की बात करते हों लेकिन चुनाव के अंतिम चरण में प्रत्याशी की बिरादरी अहम भूमिका निभाती दिखती है। यही कारण है कि टिकट वितरण के समय जहां राजनीतिक दल संबंधित प्रत्याशी की बिरादरी देखते हैं, उनके क्षेत्र में संबंधित बिरादरी का स्टार प्रचारक भेजते हैं। इस विधानसभा चुनाव में भी प्रत्याशियों की जीत में उनकी बिरादरियों ने अहम भूमिका का निर्वहन किया है।
करनाल की सीट भाजपा की दृष्टि में भी काफी अहम थी, क्योंकि ये सीट पिछले 10 सालों से हॉट सीट रही है। इस सीट से दो बार मनोहर लाल जीते तो एक बार उप चुनाव में नायब सिंह सैनी चुनाव जीतकर बतौर मुख्यमंत्री प्रदेश की सत्ता संभाल चुके हैं। अब सीट पर अन्य राजनीतिक दलों की निगाहें भी टिकी थी। शहरी क्षेत्र के साथ कुछ गांव भी ऐसे हैं जहां पंजाबी बिरादरी की बहुलता है। जिसके कारण भाजपा ने भी यहां जगमोहन आनंद के रूप में पंजाबी चेहरा ही उतारा। वहीं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने पंजाबी सम्मेलन बुलाकर माहौल बनाया। आखिरकार, करनाल की सीट 33652 मतों से भाजपा ने जीत ली।
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बात असंध सीट की करें तो यहां यहां योगेंद्र राणा राजपूत बिरादरी से आते हैं। यहां राजपूत बिरादरी की संख्या अच्छी खासी है लेकिन बसपा-इनेलो ने भी राजपूत बिरादरी से ही गोपाल राणा को चुनाव में उतारा था। राजपूत मतों का विभाजित होना तय था।
ऐसे में राजपूत बिरादरी के प्रधान सहित अन्य पदाधिकारियों को राजपूत बिरादरी को भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बड़ी जनसभा भी असंध में ही कराई गई, योगी आदित्यनाथ सीधे तौर पर राजपूतों को बंटना नहीं-कटना नहीं का संदेश देकर गए। उन्होंने मंच से कहा कि बंटोगे तो कटोगे। ऐसे में राजपूत बिरादरी ने भी योगेंद्र राणा की जीत में अहम भूमिका निभाई, हालांकि ये सीट भाजपा सबसे कम अंतर से जीत पाई।
इंद्री सीट की बात करें तो यहां कश्यप बिरादरी अच्छी खासी संख्या में हैं, कमोवेश यही स्थिति कांबोज बिरादरी की भी है। यही कारण रहा कि भाजपा प्रत्याशी राम कुमार कश्यप और कांग्रेस प्रत्याशी राकेश कांबोज के बीच कड़ा मुकाबला हुआ लेकिन अंतिम समय में राकेश कांबोज पिछड़ गए। राम कुमार कश्यप दूसरी बार 15149 मतों के अंतर से विधायक बन गए। यहां कश्यप समाज के साथ सैनी आदि अन्य पिछड़ा वर्ग ने भी साथ दिया, क्योंकि ये चुनाव पिछड़ा वर्ग के नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री बनाने का था।
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घरौंडा में रोड़ बिरादरी बहुतायत में है, लेकिन यहां भी रोड़ बिरादरी से दो प्रत्याशी थे लेकिन दो बार पहले ही विधायक रह चुके हरविंद्र कल्याण की मजबूत पकड़ थी। यहां राजपूत बिरादरी का भी प्रभाव अधिक था, जाट, सिख आदि समाज भी कांग्रेस प्रत्याशी वीरेंद्र सिंह राठौर के पक्ष में रहा। ये दीगर बात है कि यहां भाजपा के हरविंद्र कल्याण ने बाजी मार ली लेकिन जीत का अंतर सिर्फ 4531 ही रहा।
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