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सीएमआर चावल के लिए होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन

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सीएमआर चावल को लेकर कई सालों से राइस मिलर्स पर गड़बड़ी करने के आरोप लगते रहे हैं। सत्यापन, जांच व रिकवरी होती है। जिसमें अनावश्क समय भी नष्ट होता है। अब इस पर केंद्र व राज्य सरकार ने रुख सख्त कर लिया है। प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने को अगले सीजन से राइस मिलर्स को धान आवंटित करने की प्रक्रिया में रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन कर दिया है। करनाल सहित हरियाणा के सभी 1300 से अधिक राइस मिलर्स को अब धान आवंटित कराने के लिए अनिवार्य रूप से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
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अब तक धान प्राप्त करने के लिए राइस मिलर्स अभिलेखीय आवेदन करते थे। जिनकी फाइल तैयार होकर डीएफएससी चंडीगढ़ जाती थी। फाइल में यदि कोई कमी होती थी तो पूरा करा लिया जाता था। इसके बाद डीएफएससी के इंस्पेक्टर मौके पर जाकर फाइल में बताए गए मानकों, गोदाम, मशीनों, स्थान आदि का स्थलीय सत्यापन करते थे। इसी इंस्पेक्टर की रिपोर्ट पर राइस मिलर्स को धान का आवंटन कर दिया जाता था। बताया जाता है कि गड़बड़ियां यहीं से शुरू हो जाती थी, कई ऐसे राइस मिलर्स हैं, जो डीएफएससी के इंस्पेक्टर आदि से मिलकर क्षमता से अधिक धान आवंटित करा लेते थे। कुछ ऐसे भी थे, जिनके मिल भले ही बंद हों लेकिन धान का आवंटन हो जाता था। बाद में जांच में पकड़े जाने के बाद कहीं धान कम तो कहीं चावल की कमी पाई जाती थी। इन सब गड़बड़ियों को शुरुआती दौर से ही रोकने को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने धान के आने वाले सीजन को पारदर्शी बनाने का फैसला किया है, जिसके तहत अब राइस मिलर्स को धान के आवंटन के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा। जिसमें राइस मिल की क्षमता, गोदाम, मशीनों की कैपिसिटी, चावल बनाने की क्षमता, सिक्योरिटी, जीएसटी नंबर, पंजीकरण नंबर आदि सब ऑनलाइन भरना होगा। यह प्रक्रिया एक सितंबर से शुरू हो जाएगी।
धान आवंटन से लेकर निर्धारित अवधि तक सीएमआर चावल की आपूर्ति होने तक कई तरह की गड़बड़ियां व अनावश्यक विलंब देखने को मिलता है। कई बार सत्यापन, जांच आदि करनी पड़ती है। इसलिए अब विभाग ने प्रक्रिया को शुरुआती दौर से ही पारदर्शी बनाने के लिए धान के आवंटन की मांग के लिए राइस मिलर्स का रजिस्ट्रेशन ऑनलाइन कराने का फैसला किया है। जिस राइस मिल संचालक को धान चाहिए वह पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करेगा। यह प्रक्रिया सिंतबर से शुरू हो जाएगी।
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निशांत राठी, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक करनाल।
पिछले साल आवंटित धान का चावल ही अभी देना शेष है।, विभाग को शेष चावल की आपूर्ति करने के लिए राइस मिलर्स को कम से कम 45 दिन का समय देना चाहिए। इसके बाद नए सीजन की बात करनी चाहिए। विभाग को पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की सभी शर्तों को विस्तार से बताना चाहिए तभी राइस मिलर्स विचार कर सकेंगे कि वह धान ले पाएंगे या नहीं। यदि शर्तें अनुकूल लगेंगी तो धान लेंगे, अन्यथा इनकार कर देंगे। लेकिन पहले जो चावल शेष हैं, उसे वापस ले लिया जाए क्योंकि इससे राइस मिलर्स की बदनामी हो रही है।
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विनोद कुमार गोयल, सीनियर वाइस प्रेसीडेंट हरियाणा राइस मिलर्स एसोसिएशन
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