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विश्व बैंक के प्रतिनिधियों भाई बागवानी तकनीक

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। विश्व बैंक की तीन सदस्यीय टीम बुधवार को राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना (एनएएचएपी) के तहत महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय पहुंची। यहां कुलपति प्रो. समर सिंह ने टीम सदस्यों का स्वागत किया। टीम ने क्षेत्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र मुरथल का भी दौरा किया। यहां की विभिन्न तकनीकों को देखकर प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण कार्य की सराहना की। इससे उम्मीद है कि शीघ्र विश्वविद्यालय में कुछ नए प्रोजेक्ट शुरू होंगे।
महाराणा प्रताप बागवानी विवि कुलपति प्रो. समर सिंह ने विश्व बैंक की टीम से कहा कि जो परियोजना विश्व बैंक ने एमएचयू में शुरू किए थे, उन्हें तय समय पर पूरा किया गया। जिनका फायदा किसानों और विद्यार्थियों को मिल रहा है। यदि परियोजना का विस्तार होगा या नए परियोजना एमएचयू में शुरू होंगे तो ये बागवानी विश्वविश्वविद्यालय के लिए लाभदायक साबित होंगे। जिससे किसान काफी तेजी से बागवानी खेती के साथ जुड़ सकेंगे, साथ ही बागवानी विश्वविद्यालय जिस उद्देश्य के लिए शुरू की गई है। उसमें काफी तेजी से आगे बढ़ेगी। कुलपति ने कहा कि विवि में ड्रोन प्रशिक्षण केंद्र खोला जा रहा है, जिसके तहत यूनिवर्सिटी में किसानों ओर युवाओं को पायलट बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे वे स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सके। विश्व बैंक टीम सदस्य रोबिन, नितेश देखमुख ने एमएचयू की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि यूनिवर्सिटी जिस तेजी से नए आयाम स्थापित कर रही है। जिससे आने वाले दिनों में बागवानी विश्वविद्यालय विश्व की बेहतरीन यूनवर्सिटी में गिनती होगी। कुलपति ने टीम सदस्यों को स्माृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
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इससे पहले टीम द्वारा महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र मुरथल का भी दौरा किया। बता दे कि विश्व बैंक द्वारा नेशनल एग्रीकल्चर हायर एजुकेशन प्रोजेक्ट के तहत 2018 में प्रोजेक्ट शुरू किया था। टीम द्वारा निरीक्षण का मकसद नेशनल एग्रीकल्चर हायर एजुकेशन के तहत कार्यों की समीक्षा करना था। मौके पर रजिस्ट्रार डॉ अजय सिंह, डॉ विजय अरोड़ा सहित अन्य मौजूद रहे।
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