संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिजली निगम से संबंधित शिकायत में साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद शिकायतकर्ता के उपस्थित न होने पर शिकायत को खारिज कर दिया है। मामला अंधेडा गांव निवासी प्रदीप कुमार की ओर से उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के अधिकारियों के खिलाफ दायर किया गया था। आयोग ने टिप्पणी की कि मामले को बार-बार स्थगित करना न केवल आयोग के बहुमूल्य समय की बर्बादी है, बल्कि विपक्षी पार्टी के लिए भी उत्पीड़न के समान है। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत को खारिज कर दी।
आयोग के फैसले के अनुसार, अंधेड़ा गांव निवासी शिकायतकर्ता प्रदीप कुमार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत उपमंडल अधिकारी और अधिशासी अभियंता के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। यह शिकायत मार्च, 2025 में संस्थान में लाई गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल व सर्वजीत कौर की पीठ ने पाया कि शिकायतकर्ता को अपने पक्ष में सबूत पेश करने के लिए कई अवसर दिए गए थे। सोमवार को मामले की सुनवाई के लिए अंतिम अवसर निर्धारित किया गया था, लेकिन शाम साढ़े बजे तक न तो शिकायतकर्ता उपस्थित हुआ और न ही कोई साक्ष्य पेश किया गया।
पर्याप्त समय दिया गया
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को साक्ष्य जुटाने के लिए पहले ही पर्याप्त समय दिया जा चुका था। बार-बार बुलाए जाने के बाद भी किसी का उपस्थित न होना यह दर्शाता है कि शिकायतकर्ता अब इस मामले को आगे बढ़ाने में रुचि नहीं रखता है। अदालत ने यह भी संभावना जताई कि शायद शिकायतकर्ता की समस्याओं का समाधान बिजली निगम की ओर से पहले ही किया जा चुका हो। आयोग ने टिप्पणी की कि मामले को बार-बार स्थगित करना न केवल आयोग के बहुमूल्य समय की बर्बादी है, बल्कि विपक्षी पार्टी के लिए भी उत्पीड़न के समान है। इसी आधार पर आयोग ने शिकायत को खारिज करते हुए फाइल को रिकॉर्ड रूम में भेजने के निर्देश दिए हैं।