पानीपत रिफाइनरी की
पाइपपाइन से तेल चुराने के मामले में आरोपियों ने तीन माह तक लगातार रेकी
की। इसके लिए बाकायदा एक भवन को किराए पर लिया गया। इसके बाद रात के समय दो
माह में लंबी सुरंग खोद डाली, फिर निकालना शुरू किया पाइपलाइन से तेल।
करीब छह माह तक चले इस तेल के खेल में एक माह में ही आरोपियों ने पाइपलाइन
से 70 लाख रुपये का तेल निकाल लिया। इस सनसनीखेज मामले की खास बात यह भी है
कि तेल के खिलाड़ियों ने इस बार नई तकनीक का इस्तेमाल किया। पहली बार
पाइपलाइन ने नीचे वाल्व (पंचर) करके तेल निकाला गया, जबकि इससे पहले प्रदेश
में जहां भी इस प्रकार के मामले सामने आए, वहां पर पाइप के ऊपर पंचर करके
तेल निकाला जाता था। यह खुलासा खुद गिरफ्तार तीनों आरोपियों शिवचरण निवासी
शेखपुरा खालसा, रामनिवास निवासी अलीपुर खालसा और राजेश निवासी कोहंड ने
पुलिस के सामने किया है। तीनों आरोपियों को गुरुवार को अदालत में पेश किया
जाएगा।
आधे रेट में बेचा तेल, फिर लाखों के वारे न्यारे
आरोपियों
ने बड़ी चतुराई के साथ इस खेल को अंजाम दिया। कांडला भटिंडा की ओर जाने
वाली पाइपलाइन से जुलाई माह में आरोपियों ने करीब 70 लाख रुपये का तेल
निकाल लिया और बेच दिया। एसपी ने बताया कि रात के समय तेल निकाला जाता था।
सुरंग के अंदर से पाइपपाइन से एक पाइप जोड़कर सीधे टैंकर में तेल जाता था।
एसपी ने दावा किया कि आरोपियों ने तेल को 30 से लेकर 40 रुपये प्रति लीटर
के हिसाब से दिल्ली व हरियाणा के हिस्सों में बेचा है। बता दें कि मार्केट
में डीजल की कीमत 50 रुपये प्रति लीटर है, जबकि आरोपियों ने इसे आधे रेट
में बेच दिया। बावजूद इसके एक माह में लाखों रुपये का खेल कर गए। आरोपियों
ने एक माह में करीब 14 बार तेल निकालना कबूला है। एक टैंकर में 18 हजार
लीटर तेल आता है। ऐसे में एक कैंटर की कीमत साढ़े छह से सात लाख रुपये तक
थी। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि करीब दस टैंकर चोरी के तेल के बेचे
गए। पुलिस अब मुख्य आरोपी की तलाश कर रही है।
अपनाई नई तकनीक
इससे
पहले के तेल चोरी के मामलों की बात करें तो पाइपलाइन के आसपास गड्ढा खोदकर
उसमें एक वॉल्व फिट करके उसे बंद कर दिया जाता था। कई बार बारिश के कारण
ऐसे स्थानों की मिट्टी धंस जाती थी और ऐसे में यह चोरी पकड़ी जाती थी। तेल
के खिलाड़ियों ने पहली बार सुरंग खोदी। बारिश का सीजन आने से पहले इस धंधे
को अंजाम दिया गया, बीच में बारिश आई तो आरोपियों ने सुरंग के अंदर लकड़ी
के तख्त भी लगा रखे थे, ताकि बारिश के कारण मिट्टी न धंसे। इस स्थान के ऊपर
से गुजरने पर भी किसी को आभास नहीं होता था कि नीचे तेल चोरी हो रहा है।
इसलिए पूरी तकनीकी और वैज्ञानिक तरीके से इस तेल चोरी का काम चल रहा था।
रिफाइनरी के अधिकारियों को भी इस चोरी को पकड़ने में काफी मशक्कत करनी पड़ी
थी। बार-बार रिफाइनरी की पिग मशीन यहीं पर गड़बड़ी के संकेत दे रही थी।
दिल्ली से जुड़े हैं तार, तीन स्थानों पर बेचा तेल
मीडिया
से रूबरू एसपी पंकज नैन ने माना कि तेल के कारोबारियों के तार दिल्ली व
अन्य प्रदेशों से जुड़े हैं। पाइपलाइन से चोरी किया गया डीजल आरोपियों ने
दिल्ली व हरियाणा के तीन स्थानों पर बेचा। तेल खरीदने वालों की भी पहचान हो
गई है, उनको काबू किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने पेट्रोल पंप मालिकों के
शामिल होने से इंकार किया है। जिन्होंने चोरी का तेल खरीदा है, उनकी
फैक्ट्री हैं और तेल का कारोबार है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान एक टैंकर
भी काबू किया है। एसपी ने बताया कि इस मामले में दस लोग शामिल हैं और यह
पूरी तरह से एक गिरोह की तरह काम कर रहे थे। मुख्य सरगना की पहचान हो गई
है, उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। उन्होंने माना कि पहले,
आरोपी का नाम गलत बताया गया था, उसका एड्रेस फर्जी निकला है। पुलिस के लिए
अब फरार लोगों को गिरफ्तार करना बड़ी चुनौती होगी।
चालकों को मिलता था शेयर
जांच
अधिकारी ने बताया कि शिवचरण ने ही भवन किराये पर दिलाया था, जबकि रामनिवास
व राजेश ट्रांसपोर्ट का काम करते थे और गाड़ी लेकर तेल बेचने जाते थे।
जितने रुपये का टैंकर बिकता था, इसके बदले उन्हें हिस्सा मिलता था। इसके
अलावा इस बात की जांच की जा रही है कि सुरंग मजदूरों ने खोदी था या फिर
गिरोह के ही सदस्यों ने। इसको लेकर पुलिस छापेमारी कर रही है।
तेल
चोरी के मामले का पर्दाफाश हो गया है। तीन आरोपी काबू किए हैं, साथ ही
टैंकर भी बरामद किया है। मुख्य सरगना की पहचान हो गई है, उसकी गिरफ्तारी के
लिए दबिश दी जा रही हैं। इस मामले में करीब दस लोगों के शामिल होने की
आशंका है। फिलहाल इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की है। गुरुवार को
आरोपियों को अदालत में पेश किया जाएगा। किसी भी सूरत में क्षेत्र में तेल
का खेल नहीं चलने दिया जाएगा।
पंकज नैन, एसपी।