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अपने प्लॉटों को विभािजत कर रजिस्टरी करा सकेंगे पुनर्वासित

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माई सिटी रिपोर्टर
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करनाल। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हुए देश के बंटवारे के दौरान कई लोग पाकिस्तान के हिस्से को छोड़ हिंदुस्तान आए। ये लोग करनाल सहित हरियाणा के विभिन्न जिलों में बसे थे। ऐसे लोगों के लिए हरियाणा सरकार ने हरियाणा म्यूनिसिपल एक्ट 1973 तथा हरियाणा नगर निगम अधिनियम 1994 के सेक्शन 398 के तहत टाऊन प्लानिंग स्कीम, पुनर्वास स्कीम और इंप्रूवमेंट स्कीम के म्यूनिसिपल एरिया में स्थित प्लॉटों के सब डिवीजन, नक्शे पास करवाने की पॉलिसी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। एक दो दिन में ही सरकार ऑनलाइन आवेदन करने के लिए पोर्टल जारी कर देगी। पिछले 75 वर्षों से प्लॉटों के टुकड़े (सब डिवीजन) कराने के लिए परेशान करनाल के करीब ढाई हजार से अधिक लोगों सहित हरियाणा के हजारों लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि अब ये लोग अपने बड़े प्लॉट को टुकड़े करके उनकी रजिस्टरी करा सकेंगे, नक्शे पास करा सकेंगे। आसानी से बेच भी सकेंगे।
बंटवारे के बाद पाकिस्तान के हिस्से में आए क्षेत्र से हजारों की संख्या में लोग हरियाणा व देश के अन्य भारतीय राज्यों में जाकर बसे। करनाल जिले में भी कई स्थानों पर पुनर्वास के तहत उन्हें तीन श्रेणियों में प्लॉट दिए गए। लोअर इंटीग्रेटेड ग्रुप (एलआईजी) के तहत 40-40 गज के प्लॉट दिए गए, जो अधिकांश रामनगर क्षेत्र में हैं। दूसरे मीडियम इंटीग्रेटेड ग्रुप (एमआईजी) के तहत 200 गज के प्लॉट दिए गए जो अधिकांशत: प्रेमनगर में हैं, इसके बाद हायर इंटीग्रेटेड ग्रुप (एचआईजी) के तहत 400 गज व उससे अधिक बड़े प्लॉट दिए गए, जो अधिकांशत: मॉडल टाउन में हैं। इसके अलावा दयाल सिंह कॉलोनी, बैंक कॉलोनी, कर्म सिंह कॉलोनी, माल रोड, संत नगर, दीवान इकबाल नाथ कॉलोनी के अलावा इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की न्यायपुरी, रमेश नगर, न्यू रमेश नगर, इंदिरा कॉलोनी तथा चौधरी हाउस कॉलोनी आदि में भी प्लॉट व भूमि दी गई थी। इन सभी क्षेत्रों को हरियाणा सरकार का आजादी के अमृत महोत्सव पर ये बड़ा तोहफा माना जा रहा है।
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आजादी के अमृत महोत्सव पर तोहफा
पुनर्वास के तहत जिन पाकिस्तान से आए लोगों को प्लॉट दिए गए थे, वह भवन बनाकर रहने लगे, लेकिन परिवार बढ़े तो अलग-अलग भवनों की आवश्यकता पड़ी। कुछ लोगों से भाई व बेटे अलग हो गए, लेकिन कानूनी अड़चन के कारण प्लॉट के टुकड़े नहीं हो सकते थे। 75 साल बाद भी प्लॉट उतने ही बड़े हैं, उन्हीं के नाम हैं। कई लोग उनमें से नहीं रहे, लेकिन वह प्लॉटों को बेच भी नहीं सकते थे, क्योंकि न तो नक्शा पास हो सकता था न ही रजिस्टरी।
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100 वर्ग मीटर से कम के प्लॉट का नहीं होगा विभाजन
हरियाणा सरकार ने पॉलिसी का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। 1980 की स्कीमों के तहत अलॉट किए गए इन प्लॉटों को ही इस पॉलिसी के तहत नियमित किया जाएगा। प्लॉट जिसका सब डिविजन किया जाना है, वह 200 वर्ग मीटर या उससे अधिक का होना चाहिए और 100 वर्ग मीटर से कम साइज के प्लॉट को सब डिवाइड नहीं किया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही पोर्टल जारी किया जाएगा, जिसमें ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
-नरेश नरवाल, आयुक्त नगर निगम, करनाल
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