करनाल। देश में गेहूं की फसल बेहतर है, कोई बड़ी बीमारी भी नहीं आई है और मौसम भी अब तक अनुकूल ही रहा है, जिसका परिणाम ये है कि इस बार देशभर में गेहूं की 1154.30 लाख मीट्रिक टन की रिकॉर्ड पैदावार होने की संभावना है। खास बात ये भी है कि देश में गेहूं का रकबा भी 7.73 लाख हेक्टेयर बढ़ चुका है।
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) करनाल के निदेशक डॉ. रतन तिवारी ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय से प्राप्त अब तक के आंकड़ो के आधार पर बताया कि ये खुशी की बात है कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में जहां घटती जोत और बढ़ती खपत (आबादी के अनुसार) के बीच पैदावार को बढ़ रही है। देश में गेहूं की फसल तैयार है, अब तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश में मध्य व महाद्वीप क्षेत्रों में गेहूं की 16 प्रतिशत कटाई पूरी हो चुकी है।
उन्होंने बताया कि वर्ष-2023-24 में देश में गेहूं की रकबा 318.33 लाख हेक्टेयर था, जो अब वर्ष 2024-25 में बढ़कर 326.06 लाख हेक्टेयर हो चुका है। रकबे में करीब 7.73 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसी तरह गेहूं की पैदावार की बात करें तो पिछले साल की पैदावार 1132.90 लाख मीट्रिक टन थी, जो इस साल 2024-25 में बढ़कर 1154.30 लाख मीट्रिक टन पहुंचने की संभावना है।
देश में इस बार गेहूं की औसतन उपज 21.4 लाख टन अधिक होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि हमारा देश में पिछले कुछ सालों से गेहूं की पैदावार के मामले में दुनिया में दूसरे स्थान पर है, चीन में गेहूं की पैदावार अभी हमसे अधिक है लेकिन प्रयास किया जा रहा है कि हम दुनिया के नंबर वन गेहूं उत्पादक देश बन सकें।
डॉ. तिवारी ने बताया कि आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से पूरा विश्व ही चिंतित है लेकिन आईआईडब्ल्यूबीआर सहित देश कई के अनुसंधान संस्थानों ने जलवायु सहनशील किस्मों को विकसित किया है, अभी इस पर समय की आवश्यकता के अनुसार लगातार अनुसंधान चल रहा है, हर साल नई किस्में आ रही हैं, जो किसानों तक पहुंच भी रही है, जिनकी पैदावार को बरकरार रखने और उसे और बढ़ाने में मदद मिल रही है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024-25 के दौरान 60 प्रतिशत क्षेत्र में जलवायु सहनशील नई किस्मों की बुवाई की गई है। बड़ी बात ये भी है कि इस साल देश में गेहूं की फसल में कोई भी बीमारी दर्ज नहीं की गई है। इसके साथ साथ मौसम ने भी अभी अनुकूलता बनाए रखी है, इन सबके कारण ही देश में गेहूं की पैदावार बढ़ी है। अंतिम आंकड़े तो फसल की पूर्ण कटाई होने के बाद ही आएंगे लेकिन कृषि विभाग के अब प्राप्त आंकड़े उत्साहित करने वाले हैं।
उन्होंने नई किस्मों में उत्तर भारत में आईआईडब्ल्यूबीआर करनाल द्वारा विकसित डीबीडब्ल्यू-187, डीबीडब्ल्यू-303, डीबीडब्ल्यू-222 ने मजबूत पकड़ बनाई है, वहीं खासकर हरियाणा पंजाब में डीबीडब्ल्यू-327 किसानों की पहली पसंद बनी है। मध्य क्षेत्र में पूसा तेज, (एचआई 8759) काफी बेहतर स्थिति में देखी जा रही है। इसके अलग अन्य कई जलवायु सहनशील किस्मों ने देश के अलग अलग हिस्सों ने किसानों को पसंद में स्थान बनाया है।