कैथल के धुंधरेहड़ी का रहने वाला साहिल भी डिपोर्ट होने वालों में शामिल है। उसकेपिता चरण सिंह ने बताया, साहिल को करीब छह महीने पहले ही 40 लाख का कर्ज लेकर डंकी मार्ग से अमेरिका भेजा था। वह एक छोटा किसान और करीब डेढ़ एकड़ जमीन पर खेती हैं। वह तभी से अमेरिकी पुलिस की हिरासत में था। अब उसे वापस भेज दिया गया है। साहिल को लेने के लिए परिजन अमृतसर पहुंच चुके हैं। वे वीरवार को कैथल पहुंचेंगे।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के बाद अमृतसर में डिपोर्ट किए गए लोगों में से 11 लोग कैथल जिले से हैं। अब इन लोगों के परिवार सहित अन्य रिकॉर्ड को लेकर जिला प्रशासन की ओर से जांच शुरू की जाएगी। इन लोगों को वीजा नियमों के उल्लंघन और अवैध प्रवास के कारण अमेरिका से डिपोर्ट किया गया है।
गौरतलब है कि अमेरिका से डिपोर्ट हुए जिले के 11 लोगों में एक महिला भी शामिल है। वहीं, इसमें प्रदेश के भी 33 लोग शामिल हैं। ये अधिकतर लोग ग्रामीण क्षेत्रों से संबंध रखते हैं। डीएसपी मुख्यालय वीरभान ने बताया कि अभी तक डिपोर्ट किए गए लोगों की आधिकारिक सूची सरकार या उच्च अधिकारियों से प्राप्त नहीं हुई है। सूची मिलते ही सभी व्यक्तियों के रिकॉर्ड की जांच की जाएगी और यदि किसी की आपराधिक पृष्ठभूमि पाई गई तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- प्यौंदा निवासी अभिषेक
- धुंधरेहड़ी साहिल
- कैथल शहर निवासी जितेश वालिया
- अटैला निवासी अमन कुमार
- खेड़ी साकरा निवासी ओमी देवी
- कसान निवासी अंकित
- मटौर निवासी संदीप
- कैथल शहर निवासी रमेश
- अरनौली निवासी गुरप्रीत
- गांव काकौत निवासी प्रिंस
- स्यों माजरा निवासी मनदीप
प्रशासन इस मामले में विस्तृत जांच करेगा और आधिकारिक सूची के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। - वीरभान, डीएसपी मुख्यालय, कैथल।
अमेरिका से डिपोर्ट किए गए लोगों में करनाल जिले के करीब 12 लोग शामिल हैं। इनमें हैबतपुर गांव का एक परिवार भी शामिल है। जिनमें माता-पिता, बेटा-बेटी भी शामिल है। डिपोर्ट हुए लोगों में ज्यादातर युवा शामिल हैं। अमेरिका जाने के लिए किसी ने अपनी जमीन बेची है तो किसी ने घर। ये लोग लाखों रुपये कर्ज लेकर अमेरिका गए थे, लेकिन अब वापस आना पड़ गया। फिलहाल सभी 12 लोगों को पंजाब के अमृतसर में रोका गया है। वहीं जिला पुलिस भी इन लोगों का सत्यापन कर रही है कि इनमें किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है।
घरौंडा निवासी अरुण (24) 14 महीने पहले अमेरिका के लिए निकला था। परिवार के लोगों ने आधी एकड़ जमीन बेचकर व 12 लाख रुपये कर्ज लेकर अरुण को अमेरिका भेजा था। परिवार ने कुल 45 लाख रुपये खर्च किए थे। अरुण के भाई गौरव ने बताया कि उनके घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। पिता और वह खुद एक ही कंपनी में काम करते हैं। वह पांच भाई-बहन हैं। सभी भाई-बहनों की वह अच्छे से शादी करवा सके, इसलिए अरुण अमेरिका डॉलर कमाने गया था।
अरुण कई दिनों तक भूखे-प्यासे जंगल में पैदल चला। इस दौरान उसने नदी को भी पार किया था। जिसमें जान जाने का भी खतरा था। जिस नाव में 10 से 15 व्यक्ति बैठ सकते थे। उस पर 20 से 25 युवक होते थे। इस दौरान नाव पलटने का भी खतरा था। वह किसी तरह खतरों को पार कर 26 जनवरी को अमेरिका पहुंचा था, जहां अमेरिका की पुलिस ने पकड़ लिया। अब उन्हें चिंता है कि उनका कर्ज कैसे उतरेगा। कैसे घर चलेगा।
घरौंडा के कालरों गांव निवासी आकाश (20) ढाई एकड़ जमीन बेचकर 65 लाख रुपये खर्च कर अमेरिका गया था। आकाश के भाई शुभम ने बताया कि वह 10 महीने पहले अमेरिका के लिए घर से निकला था। पहले वह जहाज में मुंबई गया। इसके बाद अलग-अलग देशों में भटका। एजेंट ने कई देशों को तो गाड़ी में छिपाकर पार कराया, कहीं जंगल के रास्ते पैदल चला। इस दौरान मैक्सिको के समीप नदी में उसके सारे कपड़े बह गए थे। इसके बाद उसके पास परिवार ने रुपये भेजे थे। तब जाकर वह 26 जनवरी को अमेरिका पहुंचा था। वहीं से अमेरिका की पुलिस ने पकड़ लिया। वह चार भाई हैं। पिता की कई साल पहले मौत हो चुकी है। खेती करके ही घर का गुजारा होता था। अब जमीन भी बिक गई है। घर के लोगों को गुजारा चलाने की चिंता सता रही है।