करनाल। करीब छह दशक पुराने सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद के समाधान की दिशा में रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल रविवार को करनाल पहुंचेगा। केंद्र सरकार की ओर से गठित ट्रिब्यूनल ने शनिवार को कुरुक्षेत्र में निरीक्षण किया था। ट्रिब्यूनल के आने को देखते हुए शनिवार को सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने मूनक हेड का निरीक्षण किया। निरीक्षण के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं।
ट्रिब्यूनल के निरीक्षण में मूनक हेड मुख्य केंद्र रहेगा। यहां पर इंद्री में ताजेवाला हेड से पश्चिम यमुना नहर आती है। जो आगे दो भागों में बंट जाती है। मूनक हेड पर हांसी ब्रांच नहर से पानी हांसी तक भेजा जाता है। दूसरी दिल्ली ब्रांच है। इससे पानी दिल्ली भेजा जाता है। इसके अलावा आवर्धन नहर का भी निरीक्षण किया जाता है। इन नहरों निरीक्षण का उद्देश्य रावी और ब्यास नदी तंत्र से जुड़े पानी की उपलब्धता, वितरण और उपयोग की वास्तविक स्थिति को समझना रहेगा। जिससे हरियाणा, पंजाब और राजस्थान के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवाद पर तकनीकी तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जा सके।
गौरतलब है कि एसवाईएल नहर को लेकर हरियाणा और पंजाब के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। हरियाणा का कहना है कि उसे उसके हिस्से का पानी मिलना चाहिए जबकि पंजाब अतिरिक्त पानी की उपलब्धता से इनकार करता रहा है। ऐसे में रावी-ब्यास जल ट्रिब्यूनल की यह तकनीकी पड़ताल बेहद अहम मानी जा रही है। इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी और नीतिगत निर्णय लिए जा सकते हैं।