कुरुक्षेत्र में सांस्कृतिक महाकुंभ की सतरंगी छटा से रत्नावली का ललाट दमकता हुआ नजर आया। रत्नावली फेस्टिवल के दूसरे दिन केयू में छह मंच सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सजे थे। यहां विभिन्न विधाओं की पूरी ऊर्जा के साथ प्रस्तुति देते कलाकारों ने जमकर तालियां और वाहवाही बटोरीं।
हरियाणवी गजल, रसिया, लोकगीत, हरियाणवी वाद्ययंत्र, छात्र-छात्राओं के एकल नृत्य, गीत संगीत और सांग का जलवा ऐसे बिखरा की दर्शक यह तय नहीं कर पाए कि पहले किसका आनंद लें, क्योंकि कई प्रोग्राम एक साथ थे।
रत्नावली के दूसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हरियाणवी गजल और हरियाणवी लोक गीत, एकल नृत्य और हरियाणवी क्विज से हुई। अलग-अलग सांस्कृतिक मंचों पर आयोजित इन प्रतियोगिताओं से केयू परिसर गुलजार दिखा।
वहीं हरियाणवी गजल की मिठास पर श्रोता मंत्रमुग्ध दिखे। आज केयू के ऑडिटोरियम में आयोजित गजल कुछ इस अंदाज में सुनाई दी- रस बिखेरा...जिऊं किस आस पै... आस तेरी छोड़ कै......, भोली भोली शान तेरी बहुत याद आवै सै......, तनै प्यार करूं यूं जितना मैं...। याद वा आवै रै....., तेरे जैसी छौरियां तै बस रैहण दे...घणा मैं बतलाया ना करूं.....।
आडिटोरियम हाल में जहां हरियाणवी गजल में 17 प्रतिभागियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया तो वहीं आरके सदन में हरियाणवी लोग गीतों की रसधार बही। आंगण बीच कुआं राजा डूब कै मरूंगी.....और पी पी पपीहा बोलै बाग मैं ....आदि गीतों ने श्रोताओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। दूसरी ओर ओपन एयर थियेटर में हरियाणवी एकल नृत्य प्रतियोगिताओं में हरियाणा की लचक दिखाई दी।
प्रतियोगिता में कुल आठ टीमों ने भाग लिया। मै नई नवेली आई....., मैं ना मानूं पिया जी तेरी बात....., उड़ जाईये रे कबूतर तनै मारै बिजली उड़ जाईये रे..... आदि गीतों पर युवा कलाकारों ने जम कर थिरकनें दिखाई।
उधर दिमाग को खंगालने के लिए सीनेट हाल में आयोजित हरियाणवी क्विज का आयोजन हुआ। इसमें प्रदेश भर से सिर्फ एक टीमों ने भाग लिया। उधर खुले मंच से सांग प्रतियोगिता का आयोजन देर शाम तक चलता रहा।
लुप्त होते घरेलू सामान का अनूठा संग्रह भी दिखा
क्रश हाल में आयोजित ओल्ड एंटीक हरियाणवी कलेक्शन की प्रदर्शनी में हरियाणा की पुरातन घरेलू वस्तुओं का आकर्षण भी दर्शकों को खींचने में कारगर रहा। बागड़ियों द्वारा बनाया गया लोहे का झरणा, मटका रखने का चाखड़ा, कापण, सपड़ा, कौंची, प्राचीन सिक्के, चारपाई बुनाई में काम आने वाला हिरण का सींग, बेलवी व पुरानी सुरमेदानी आदि चीजों को देख कर बुजुर्गों ने अपने जमाने को याद किया।
विदेशी महिला ने लिया रत्नावली का आनंद
रत्नावली का विश्व व्यापन इस बात से भी नजर आता है कि एक युवा महिला अपने 11 माह के बच्चे को लेकर रत्नावली देखने पहुंची। उसने बताया कि वह रविवार शाम से रत्नावली देख रही है।