अंबाला कैंट। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग सालभर उपभोक्ताओं को राहत नहीं दे पाया, जबकि बायोमीट्रिक सिस्टम से राशन देने की योजना पहले ही कदम पर औंधे मुंह गिर गई। इतना ही नहीं राशन डिपो संचालक साल भर मनमानी करते रहे, जबकि जनता ने शिकायतें तक कीं। इसके बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल पाई। डिपो संचालकों, उपभोक्ताओं व विभाग के बीच खींचतान सालभर चली, लेकिन कोई राहत नहीं मिल पाई। कुछ डिपो अनियमितताओं के चलते कैंसल किए गए, लेकिन बाद में दूसरों के नाम से आवंटित भी किए, जबकि स्थिति फिर वैसे की वैसे ही रही।
राशन डिपो के उपभोक्ता साल भर इसी कश्मकश में जुटे रहे कि राशन कब मिलेगा और कितना मिलेगा। जिला अंबाला के अरबन एरिया के साथ-साथ 430 गांवों में राशन डिपो है, लेकिन इनमें से अधिकतर के साथ जुड़े उपभोक्ता साल भर परेशान रहे। डिपो संचालकों के साथ उपभोक्ताओं की बहसबाजी भी सालभर होती रही। अधिकारियों की मानें तो डिपो संचालकों की शिकायतें मिलीं। इन पर कार्रवाई भी हुई है। लेकिन दूसरी ओर उपभोक्ताओं का दावा रहा कि अधिकारी सिर्फ खानापूर्ति कर उभोक्ताओं को शांत करने का प्रयास करते रहे। कई मामलों में तो शिकायतें ठोस होने के बावजूद कोई राहत नहीं मिल पाई। इसी तरह राशन डिपो संचालकों ने भी कम राशन मिलने का बहाना बनाकर लोगों को कम राशन तोलकर दिया, जबकि सबसे ज्यादा दिक्कतें केरोसिन को लेकर हुई।
सबसे बड़ी योजना पहले कदम पर फ्लाप
राशन देने के लिए पहली बार इस्तेमाल की गई बायोमीट्रिक मशीनें पहले ही कदम पर जवाब दे गईं। सरकार की यह योजना उपभोक्ताओं के लिए तो सिरदर्द बनी, साथ ही डिपो संचालकों के लिए परेशानी का कारण रही। उपभोक्ताओं के फिंगर प्रिंट मैच नहीं हुए, जबकि इसी को लेकर उपभोक्ताओं ने हंगामे तक किए। इसी मुद्दे पर विपक्ष ने भी सरकार की इस योजना की तैयारियों पर सवाल उठाए। इसी को लेकर अधिकारियों की मीटिंग हुई, जबकि इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। लोगों को राशन के लिए बार-बार डिपो के चक्कर काटने पड़े।
यह कहते हैं लोग
राशन के लिए तो साल भर परेशान रहे। शायद ही कोई महीना ऐसा रहा हो, जब एक बार जाने पर ही राशन मिला हो। दो-तीन चक्कर तो काटने ही पड़ते हैं। कभी कहते हैं राशन आया नहीं तो कभी कहते हैं कल मिलेगा। हर बार यही परेशानी झेलते रहे, जबकि कोई सुनता नहीं है।
मालती देवी, अंबाला कैंट
कभी राशन कम देना, तो कभी केरोसिन न आने की बात से उपभोक्ता लगातार परेशान रहे हैं। राशन तो कई बार तय मात्रा से कम मिला, जबकि डिपो संचालक पूरी तरह से मनमानी करते रहे हैं। इसकी शिकायतें तक की गईं, लेकिन फिर भी कोई नहीं सुनता। जांच के नाम पर भी खानापूर्ति कर लोगों को शांत कर दिया जाता रहा।
- रवि कुमार, अंबाला कैंट
राशन के लिए लाइनें लगती रही हैं। उपभोक्ताओं को भटकना पड़ता है। कभी किसी का लिस्ट से नाम गायब तो कोई नाम जुड़वाने के लिए भटकता रहा। पीले राशन कार्ड के लिए तो लोगों को राहत ही नहीं मिल पाई, जबकि डिपो संचालक भी मनमाने तरीके से राशन बांटते रहे।
- सिद्धार्थ शर्मा, अंबाला सिटी
डिपो संचालक पूरी तरह से मनमानी करते रहे। नियमों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ाई गईं, उपभोक्ता अधिकारियों के दरवाजे पर गुहार लगाते रहे। सुनवाई न होने का ही कारण रहा कि उपभोक्ताओं को जो भी मिला, वह डिपो से ले लिया। अब अधिकारी व कर्मचारी भी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते रहे तो कैसे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
- गोपाल दास, अंबाला सिटी