माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। अनाज मंडियों और राइस मिलों में हुए 20 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में अब आढ़ती और मिलर पुलिस के निशाने पर हैं। गिरफ्तार हुए पांच अधिकारियों से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। आढ़तियों और मिलरों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही हैं।
सोमवार को गिरफ्तार चारों अधिकारियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वेयर हाउस के सहायक तकनीशियन प्रदीप कुमार को रविवार को ही जेल भेज दिया गया था। हैफेड के असंध प्रबंधक प्रमोद, निसिंग प्रबंधक दर्शन सिंह और खाद्य आपूर्ति विभाग के तरावड़ी के निरीक्षक देवेंद्र और इंद्री निरीक्षक रणधीर का एक दिन का अतिरिक्त रिमांड था।
इनपुट मिलने के बाद पुलिस ने आढ़तियों और मिल मालिकों की गिरफ्तारी के लिए दबिश देना शुरू कर दिया है। एसआईटी व पुलिस की अलग-अलग टीमें आरोपियों तक पहुंचने के प्रयास में हैं। मामले में गठित एसआईटी की प्रमुख एएसपी कांची सिंघल हैं। पुलिस ने शुक्रवार की रात को पांचों अधिकारियों को गिरफ्तार किया था।
भौतिक सत्यापन में सामने आया था फर्जीवाड़ा
अभी तक की जांच में सामने आया है कि अधिकारी आढ़तियों से मिलकर मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर फर्जी पंजीकरण करवाते थे। इसके बाद गेटपास कटवाकर धान की मंडी में फर्जी खरीद दिखाई जाती थी। वहीं, जब सरकार की ओर से मिलों में भौतिक सत्यापन करवाया तो बड़ा गोलमाल सामने आया। इसके बाद पुलिस की जांच आगे बढ़ती गई।