संभावित जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर जिला पुलिस और प्रशासन अलर्ट हो गया है। बुधवार को जहां घरौंडा में आरएएफ की एक कंपनी पहुंच गई, जो मूनक हेड की सुरक्षा के लिए पहुंची है, साथ ही जिला पुलिस लाइन में दिनभर करीब 500 पुुलिस जवानों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान आईजी सुभाष यादव व एसपी जेएस रंधावा ने जवानों को विशेष निर्देश भी दिये। वहीं, पिछली साल प्रभावित रहे गांवों में भी गुप्तचर छोड़े गए हैं, ताकि सूचनाएं आ सकें। उधर, जाट समाज ने अभी तक आंदोलन को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। हालांकि, गुप्त रूप से बैठकों का दौर जारी है।
बता दें कि पिछले साल जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर जिला प्रभावित रहा था। मंगलौरा, चिड़ाव मोड़, घरौंडा, बल्ला और इंद्री के कई गांवों में जाट आंदोलन लेकर जाम लगाया गया था व सरकार के खिलाफ कई दिन तक लोग धरने पर बैठे थे। इसके साथ ही मंगलौरा के पास एक पुलिस की बाइक फूंक दी गई थी। इस दौरान कई लोगों को चोटें भी आई थी। जाट समाज की ओर से 29 जनवरी से दोबारा से आंदोलन छेड़ने की चेतावनी के बाद से जिला पुलिस और प्रशासन अलर्ट हो गया है। बुधवार को दिनभर पुलिस लाइन में पुलिस कर्मचारियों ने दंगा राहत को लेकर विशेष तैयारी की और लाठी और डंडों के साथ साथ हथियार चलाने को लेकर भी तैयारी की। हालांकि, इस दौरान मीडिया को दूर रखा गया।
आईजी ने ली बैठक
आईजी करनाल रेंज सुभाष यादव ने पहले पुलिस जवानों को संबोधित किया और हर तरह से अलर्ट रहने को कहा, वहीं बाद में पुलिस अधिकारियों की अलग से बैठक ली। करीब एक घंटे तक चली बैठक में आईजी ने पिछले साल जाट आंदोलन को लेकर हुई आगजनी व अन्य घटनाओं की जानकारी ली, साथ ही उन्होंने पहले से ही आंदोलन से निपटने के लिए तैयारी के आदेश दिये। आईजी ने एसपी को निर्देश दिये कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ तालमेल करके मूनक हेड की विशेष सुरक्षा रखें साथ ही अलग से एक टुकड़ी सुरक्षा के लिए तैनात कर दें। इस बारे में एसपी जेएस रंधावा ने कहा कि संभावित आंदोलन को लेकर जिला पुलिस अलर्ट है और सभी तरह से सक्षम है।
मूनक हेड के लिए पहुंची कंपनी
घरौंडा। आने वाली 29 जनवरी से संभावित जाट आरक्षण को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। शहर व आसपास के क्षेत्र में किसी प्रकार की घटना को रोकने के लिए आरएएफ की एक कंपनी घरौंडा पहुंच गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि कंपनी को मूनक नहर पर भेजा सकता है। जाटो ने आरक्षण लेेने के लिए 29 जनवरी से हुंकार भरने का एलान कर दिया है। प्रशासन ने आरएएफ की कंपनियां मंगवा ली है। फिलहाल आरएएफ की एक कंपनी पहुंच गई है, लेकिन प्रशासन की ओर से कंपनी को किसी भी इलाके में जाने के निर्देश नहीं दिए गए है।
मूनक हेड से पानी कर दिया था परिवर्तित
कस्बे के गांव मूनक में पिछले वर्ष फरवरी माह में हुए जाट आंदोलन में कई गांवों के लोगों ने एकत्रित होकर प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी दिल्ली का पानी रोकने के लिए मूनक हेड पर पहुंच गए थे और उन्होंने दिल्ली का पानी रोकने की कोशिश की थी। इसको लेकर सीआरपी की कंपनियां तैनात की गई थी। इसके बावजूद भी प्रदर्शनकारियों ने नहर का पानी एसके नहर में परिवर्तित कर दिया है। जिससे प्रशासन में पूरी तरह हड़कंप मच गया और काफी प्रयासों के प्रदर्शनकारियों को समझाया गया था।