संवाद न्यूज एजेंसी
करनाल। जिले की अनाज मंडियों में धान की बढ़ती आवक और धीमे उठान से जगह का संकट गहरा गया है। बुधवार को मंडियों में 29,987 मीट्रिक टन (एमटी) धान पहुंचा, जबकि 9,531.49 एमटी का ही उठान हो सका। नई फसल रखने की जगह नहीं मिलने से किसानों को खुले में धान उतारना पड़ रहा है। खरीद में देरी, कम भाव मिलने और उठान की सुस्त रफ्तार के विरोध में किसान यूनियनों की तालाबंदी के कारण सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे तक खरीद भी बंद रही।
बयाना, घीड़ और कुंजपुरा में नहीं हुई खरीद
बुधवार को बयाना, घीड़ और कुंजपुरा मंडियों में धान की खरीद नहीं हुई। नीलोखेड़ी और बल्ला में भी खरीद न के बराबर रही। मंडियों में आवक जारी रहने से फसल की ढेरियां बढ़ती रहीं। तालाबंदी समाप्त होने के बाद खरीद दोबारा शुरू हुई, लेकिन धीमी खरीद और उठान के कारण जगह का संकट बना रहा।
ट्रांसपोर्ट बढ़ाने की मांग पर राइस मिलर नाराज
उठान में तेजी लाने के लिए राइस मिलरों ने मंगलवार को ट्रांसपोर्ट गाड़ियों की संख्या बढ़ाने की मांग की थी। बुधवार को एफसीआई की ओर से ट्रांसपोर्ट बढ़ाने की बात कही गई, लेकिन बाद में प्रक्रिया का हवाला देकर ट्रांसपोर्ट उपलब्ध नहीं कराने संबंधी नोटिस मिलने से राइस मिलर नाराज हो गए। उनका कहना है कि गाड़ियों की संख्या बढ़ाए बिना उठान तेज करना मुश्किल है। उन्होंने सरकार और संबंधित एजेंसियों से जल्द व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की।
16 दिन बाद भी नहीं उठा खरीदा गया धान
सरकारी खरीद शुरू हुए 16 दिन हो चुके हैं। खरीद शुरू होने के दो से तीन दिन बाद ही शेडों में जगह कम पड़ने लगी थी। अब वहां खरीदे गए धान के कट्टों के ढेर लगे हैं और उठान नहीं होने से स्थिति जस की तस बनी हुई है। खुले में रखी फसल बारिश में भीगकर खराब हो चुकी है। इसके बावजूद उठान में अपेक्षित तेजी नहीं आने से मंडियों में संकट लगातार गहरा रहा है।