- रिश्वत की पूरी रकम एडवांस में देने का बनाया जा रहा था दबाव
- डीएनए पीसीआर किट खरीद में भ्रष्टाचार मामले में शिकायतकर्ता सहायक निदेशक की शिकायत में खुलासा
- आरोप : रेट कॉन्ट्रेक्ट फाइनल करने की एवज में मांगे थे 20 लाख, पहले ली जा चुकी थी 11 लाख रुपये की रिश्वत
- शिकायतकर्ता पर था खरीद-फरोख्त में कंपनी से बात कर कमीशन फिक्स करने का दबाव
- हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस मामले में डिप्टी डायरेक्ट समेत चार लोगों पर दर्ज किया केस
संजू कुमार
करनाल। डीएनए पीसीआर किट खरीद मामले में मधुबन स्थित एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की डिप्टी डायरेक्ट डॉ. अनिता कादियान पर आरोप है कि वह रिश्वत की पूरी रकम एडवांस में देने के लिए लगातार दबाव बना रही थी। रेट कॉन्ट्रेक्ट फाइनल करने की एवज में 20 लाख रुपये मांगे गए थे। इसमें से 11 लाख रुपये रिश्वत पहले दी जा चुकी थी, जबकि 9 लाख रुपये और दिए जाने थे। इसी रकम को देने का दबाव लगातार डिप्टी डायरेक्टर की ओर से बनाया जा रहा है।
यह खुलासा इस मामले में शिकायतकर्ता डीएनए विभाग की न्याय वैदिक प्रयोगशाला के सहायक निदेशक डाॅ. राजीव क्वात्रा ने मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और विभाग के निदेशक को सौंपी अपनी शिकायतों में किया है। हालांकि इस संदर्भ में एक रिकॉर्डिंग भी सामने आई है, मगर जांच के दौरान कंपनी के अफसर व प्रतिनिधियों ने अपने बयान में डिप्टी डॉयरेक्टर को रिश्वत देने की बात से अभी इनकार किया है। फिलहाल एंटी करप्शन ब्यूरो ने इस मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद डिप्टी डायरेक्ट समेत दिल्ली की संबंधित कंपनी के निदेशक नीरज, ऑपरेशन सेल्स मैनेजर बृज सिंह, एक अन्य कंपनी के प्रतिनिधि चंद्रभानू के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में केस दर्ज कर लिया है। इस मामले की जांच चल रही है। फिलहाल इसमें कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। उधर, सूत्रों का कहना है कि डिप्टी डायरेक्ट करीब एक माह की छुट्टी पर चली गई है।
शिकायतकर्ता डाॅ. राजीव क्वात्रा ने शिकायत में कहा है कि इस मामले में रेट कॉन्ट्रेक्ट फाइनल करने की कमेटी वह भी एक सदस्य के रूप में शामिल है। क्वात्रा के अनुसार उन पर कंपनी के प्रतिनिधियों से बात कर इस किट की खरीद-फराेख्त में कमीशन फिक्स करने का दबाव था, मगर उन्होंने इसके लिए साफ इंकार कर दिया। क्वात्रा का कहना है कि इसके बाद से न केवल उन्हें प्रताड़ित किया जाने लगा, बल्कि लगातार धमकियां भी मिलने लगी।
सहायक निदेशक क्वात्रा के अनुसार संबंधित कंपनी के अधिकारी ने ही उसे बताया था कि इस मामले में उन्हें साफ कह दिया गया था कि रिश्वत दिए बिना उनकी कंपनी से किसी प्रकार की खरीद-फराेख्त नहीं हो सकती और ऐसा न करने पर दूसरी कंपनी से खरीद शुरू कर दी जाएगी। उसके बाद कंपनी के एक अधिकारी ने 11 लाख रुपये की रिश्वत दी। इसके बावजूद रिश्वत की शेष रकम भी एडवांस में ही दिए जाने का दबाव बनाया जाने लगा। ऐसा न करने पर इसी खरीद-फरोख्त मामले में डीएनए सिक्वेंसर मशीन की सीएमसी प्रपोजल को रोकने की भी धमकी दी गई।
‘आपके आसपास सब भेड़िए बैठे हैं, अपना ध्यान रखना’
क्वात्रा ने शिकायत में बताया कि इस मामले में कंपनी के संबंधित अधिकारी ने मुझे आगाह करते हुए कहा था कि ‘आपके आसपास सब भेड़िए बैठे हुए हैं, बस अपना ध्यान रखना।’ इस दौरान उसने कंपनी के अफसरों और प्रतिनिधियों से हुई बातचीत की रिकॉडिंग भी कर ली। जिसे विभाग के निदेशक व गृहमंत्री को पेन ड्राइव में भेजा गया। क्वात्रा ने बताया कि कंपनी के अधिकारी ने भी मुझसे इस मामले में पीछा छुड़वाने व मामले निपटाने में मदद करने की गुहार की।
एसआईटी की जांच में कुछ नहीं हुआ तो पहुंचा हाईकोर्ट
सहायक निदेशक का कहना है कि उसकी शिकायत पर जांच के लिए दो बार एसआईटी गठित की गई। इसके बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो उसे हाईकोर्ट का सहारा लेना पड़ा। इसके बाद एंटी करप्शन ब्यूरो के महानिदेशक ने हाईकोर्ट में जवाब दाखिल कर हाईकोर्ट को अवगत कराया है कि एंटी करप्शन ब्यूरो ने डिप्टी डायरेक्टर समेत चार लोगों पर केस दर्ज कर लिया है और इसकी जांच जारी है।
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