- नगर निगम ने जमीन का सर्वे कराने को गठित की पांच सदस्यीय समिति, लालडोरा की तर्ज पर मिलेगा मालिकाना हक
माई सिटी रिपोर्टर
करनाल। हरियाणा सरकार अब शहरी क्षेत्र के लोगों को भी लालडोरा की तर्ज पर बिना अभिलेखों वाली जमीन पर स्वामित्व देने की तैयारी में है। इसके लिए नगर निगम ने शहर के पुराने इलाकों और शहरी क्षेत्र में आने वाले गांवों में ऐसी जमीनों का सर्वे करने के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है।
ये समिति इन क्षेत्रों में जाकर ऐसी जमीन, जो कब्जे में तो है लेकिन उसके अभिलेख नहीं होने के कारण उसकी रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है, न ही संपत्ति आईडी में नाम आदि में सुधार हो पा रहा है, का सर्वे कर उसे सूचीबद्ध करेगी। जिससे इन लोगों को उनकी जमीन पर ही मालिकाना हक दिया जा सके।
करनाल शहर का पुराना इलाका जैसे वार्ड-15 का पुराना शहर और वार्ड-13 का सदर बाजार क्षेत्र सहित कई ऐसे इलाके हैं, जहां हजारों की संख्या में ऐसे लोग हैं, जिनके पास पैतृक मकान हैं। उनमें वर्षों से रह रहे हैं लेकिन अभी तक उनके पास अपने ही मकानों की जमीन के अभिलेख नहीं हैं। हालांकि नगर निगम ने ऐसे लोगों की संपत्ति आईडी तो बना दी है, जिससे वह संपत्ति कर का भुगतान भी कर रहे हैं।
समस्या ये है कि अब उस मकान को उन्हें अपने बेटों, भाइयों या किसी अन्य परिजन के नाम कराना है। किसी को अपना मकान बेचना है तो किसी को खरीदना है, या फिर अपनी संपत्ति आईडी में संशोधन कराना है मगर ये सब कराते समय पोर्टल पर रजिस्ट्री का साक्ष्य मांगा जाता है, जो इनके पास नहीं है। जिसके कारण मकान या जमीन, पहले से जिसके पास है, उसी के पास चली आ रही है।
निगमायुक्त अभिषेक मीणा ने बताया कि अब हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने ऐसी जमीनों का सर्वे कराकर संबंधित व्यक्ति को ही उसका स्वामित्व देने की तैयारी की है। नगर निगम करनाल में शहरी क्षेत्र के वार्डों व गांवों में सर्वे के लिए एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। जिसमें एक पूर्व पार्षद, दो मनोनीत सदस्य, दो निगम के अधिकारियों को शामिल किया गया है। ये टीम पूरे क्षेत्र में सर्वे कर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी और निगम को सौंपेगी। जिसे मुख्यालय भेजा जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर संबंधित भूमि पर कब्जेदारों को स्वामित्व दिया जाएगा। इसके बाद लाल डोरा की तर्ज पर उनके नाम जमीन की रजिस्ट्री हो जाएगी। फिर जमीन को खरीदने-बेचने, नाम संशोधन आदि में आ रही दिक्कतें खत्म हो जाएंगी। वह अधिकृत रूप से जमीन के मालिक बन जाएंगे। इसका सीधा लाभ शहर के पुराने इलाकों व क्षेत्रीय गांवों के लोगों को मिलेगा।