करनाल। शारदीय नवरात्र तीन अक्तूबर से शुरू हो रहे हैं, जो कि 11 अक्तूबर तक चलेंगे। 12 अक्तूबर को विजयादशमी का त्योहार मनाया जाएगा। नवरात्र के इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा होगी। नवरात्र में मां दुर्गा विशेष सवारी या वाहन पर आती हैं, इस बार वह पालकी में सवार होकर आएंगी।
श्री श्याम बाला जी ज्योतिष केंद्र के संचालक पंडित विनोद शास्त्री के अनुसार मां दुर्गा एक विशेष वाहन में आती और जाती हैं, जिसका ज्योतिष में अलग-अलग अर्थ होता है। देश दुनिया, प्रकृति, फसलों और मानव जीवन पर पड़ने वाले अच्छे-बुरे प्रभावों का पूर्वानुमान मां दुर्गा के आने और जाने वाले वाहन से लगाया जाता है। इसलिए नवरात्र में मां दुर्गा की सवारी को महत्वपूर्ण माना जाता है।
इन नवरात्र में माता रानी का वाहन पालकी होगी। ऐसा माना जाता है कि जब नवरात्र वीरवार से शुरू होते हैं तो माता का वाहन डोली या पालकी होता है। नवरात्र में जब मां दुर्गा पालकी डोली में सवार होकर धरती पर आती हैं तो इसे बहुत अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। पालकी में माता रानी का आना चिंता का विषय बन सकता है। इससे अर्थव्यवस्था में गिरावट, व्यापार में मंदी, हिंसा, देश-दुनिया में महामारी बढ़ने और अप्राकृतिक घटनाओं का संकेत मिलता है।
सप्ताह के सातों दिनों के अनुसार देवी का आगमन अलग-अलग वाहनों पर बताया जाता है। कहा जाता है कि यदि नवरात्र सोमवार या रविवार को शुरू होती है, मां दुर्गा हाथी पर सवार होकर आती हैं। यदि नवरात्र शनिवार या मंगलवार को शुरू होती है, तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं। जब नवरात्र वीरवार या शुक्रवार को शुरू होती हैं तो माता रानी पालकी या डोली पर आती हैं। वहीं जब नवरात्र बुधवार को शुरू होती है तो मां दुर्गा का वाहन नाव होता है। संवाद
किस वाहन से क्या संकेत मिलता है
पालकी पर आने का शुभ संकेत नहीं
घोड़े पर आने का शुभ संकेत नहीं
हाथी पर आना शुभ संकेत
नाव पर आना अति शुभ संकेत
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किस दिन किस स्वरूप की पूजा
03 अक्तूबर मां शैलपुत्री
04 अक्तूबर मां ब्रह्मचारिणी
05 अक्तूबर मां चंद्रघंटा
06 अक्तूबर मां कूष्मांडा
07 अक्तूबर मां स्कंदमाता
08 अक्तूबर मां कात्यायनी
09 अक्तूबर मां कालरात्रि
10 अक्तूबर मां महागौरी
11 अक्तूबर मां सिद्धिदात्री