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पॉलिथीन को कहे ना: बाजार में दिखने लगे कागज के लिफाफे और कपड़े के थैले

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पॉलिथीन रहित शहर के लिए प्रशासन और नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अभियान के मद्देनजर 26 थोक विक्रेताओं ने इसकी बिक्री बंद कर दी है। भारी भरकम जुर्माना लगाने और बार-बार छापा मारने के बाद विक्रेताओं ने कंपोस्टेबल मैटीरियल बेचना शुरू कर दिया है। मार्केट में प्लास्टिक के डिस्पोजल बर्तनों की बिक्री भी करीब करीब बंद हो गई है। निगम के अनुसार करीब 90 प्रतिशत पॉलिथीन और प्लास्टिक की बिक्री पर प्रतिबंध लग गया है। वर्तमान में निगम और प्रशासन की छापामार टीमें गोपनीय ढंग से योजना बनाकर पॉलिथीन की तलाश में लगी हैं। एक अनुमान के मुताबिक शहर में हर माह करीब 50 से 55 टन पॉलिथीन और डिस्पोजल प्लास्टिक का सामान बिकता था। इसके विकल्प के रूप में अब कागज के लिफाफे, कपड़े के थैले, कंपोस्टेबल कैरीबैग व लकड़ी के चम्मच ने ले ली है। अमर उजाला ने पॉलिथीन के खिलाफ जागरुकता अभियान चलाया था। इसमें शहर की सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के अलावा जागरूक नागरिकों ने पर्यावरण हित में पॉलिथीन का इस्तेमाल बंद करने का संदेश दिया था। दो अक्तूबर को करनाल शहर को प्लास्टिक और पॉलिथीन मुक्त घोषित कर दिया गया। जांच के चरण में इसकी बाकायदा रिपोर्ट भी तैयार होनी है। एनजीटी की तरफ से हर माह पॉलिथीन और प्लास्टिक के प्रचलन के खिलाफ चले अभियान को लेकर बाकायदा रिपोर्ट मंगवाई जा रही है कि कितने चालान किए और कितना जुर्माना किया गया। निगम की ओर से पिछले छह माह में छापा मारकर बड़ी मात्रा में पॉलिथीन जब्त की गई और करीब सात लाख जुर्माना लगाया गया।
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नगर निगम ने बनाए हैं छह बैग बैंक
नगर निगम की तरफ से छह बैग बैंक बनाए गए हैं। एक मोबाइल वैन भी इस काम में लगी है। 20 रुपये का कपड़े का थैला खरीदकर निगम उसे पांच रुपये में उपलब्ध करवा रहा है। सब्जी मंडी और मार्केट में कई जगह मोबाइल वैन से कपड़े के थैले उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। सब्जी मंडी, फड़ियों, फुटकर विक्रेताओं के पास पॉलिथीन ही नहीं होगी तो ग्राहक को कपड़े का थैला लेना ही पड़ेगा।
पैकिंग के रूप में मार्केट में भेजी पॉलिथीन कंपनियों को खरीदना भी होगा
जो पॉलिथीन बड़ी वस्तुओं की पैकिंग, कृषि कार्यों व कुरकुरे इत्यादि की पैकिंग में आ रही है। पैकिंग में उसका इस्तेमाल करने वाली कंपनी उसका निस्तारण करने के लिए जिम्मेदार है। सेंट्रल पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की तरफ से जितनी मात्रा में कोई कंपनी पॉलिथीन मार्केट में सामान के साथ भेजेगी उसे साल भर में उतनी ही पॉलिथीन खरीदना अनिवार्य किया गया है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट से ऐसी कंपनियां पॉलिथीन लेकर उसे डिस्पाज ऑफ करने वाली कंपनियों को भेजेगी।
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इन विभागों पर है जिम्मेदारी
पॉलिथीन के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम व मार्केट कमेटी के अधिकारी, संबंधित क्षेत्र के एसडीएम, तहसीलदार और बीडीपीओ छापामारी कर जुर्माना ठोक सकते हैं। इसके अलावा उद्यान विभाग, फूड एंड सप्लाई, शिक्षा विभाग सहित कई विभागों के पास जागरूकता का जिम्मा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की टीम विशेष कार्रवाई कर सकती है। नगर निगम के अधिकारियों के अलावा इस अभियान में स्वच्छ भारत मिशन के पांच मोटीवेटर और एक ट्रीगर मास्टर भी काम कर रहे हैं। निगम के सेनेटरी इंस्पेक्टर भी तत्परता से काम कर रहे हैं।
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90 प्रतिशत तक अभियान में सफलता मिल चुकी है। पॉलिथीन बंद हो चुका है। - निशांत कुमार, निगम कमिश्नर
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