सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद डीसी द्वारा अधिकारियों पर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए तो अगले दिन यानी बुधवार को सभी ने धरातल पर काम किया। 448 जगहों को सेटेलाइट के माध्यम से चिह्नित किया और मौके मुआयना करने के बाद कृषि विभाग की टीम ने 252 किसानों के खिलाफ पराली जलाकर प्रदूषण फैलाने की धाराओं के साथ अलग-अलग थानों में केस दर्ज करवाया है। जिले में बुधवार की कार्रवाई अब तक सबसे बड़ी कार्रवाई है, जबकि पूरे सीजन में मंगलवार तक मात्र 73 किसानों पर ही केस दर्ज करवाए गए थे। एक दिन में ही 300 पार हो गए। वहीं दूसरी तरफ उद्योगपतियों का कहना है कि वे प्रदूषण रोकने के लिए जनरेटर बंद करने को तैयार हैं, लेकिन प्रशासन और सरकार उन्हें पूरी बिजली उपलब्ध करवाए या फिर इसका विकल्प मौजूद करवाए। बुधवार को कृषि विभाग का एक्शन देखने के बाद दूसरे विभाग भी हरकत में आएंगे।
500 से 800 रुपये बचाने की खातिर जला रहे हैं पराली
डीडीए आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि कृषि विभाग तीन साल से किसानों को समझा रहा है। इसके लिए गांव, ब्लाक स्तर, जिला स्तर पर सेमीनार, सभाएं की। पराली जलाने के नुकसान और फायदे बताए। इसके साथ ही यह भी बताया कि पराली जलाकर खेत जुताई में लगभग 3000 खर्च आता है। जबकि पराली न जलाने के बाद 3500 से 3800 के बीच खर्च आता है। 500 से 800 रुपये के बचाने के चक्कर में मानव जीवन को किसान खतरे में डाले रहे हैं। विभाग की ओर से यंत्रों पर सब्सिडी उपलब्ध करवाई। यंत्र मुहैया करवाए। इतना न होने के बाद ही कार्रवाई को अमल में लाया गया है।
सबसे ज्यादा असंध और निसिंग में मामले
दिनभर में 448 जगहों पर आग लगाने की घटनाएं सेटेलाइट पर सामने आई हैं। मौके का मुआयना करने के बाद कृषि विभाग की टीमों ने 252 किसानों पर केस दर्ज करवाए हैं। इसमें सबसे ज्यादा असंध और निसिंग क्षेत्र के किसान शामिल हैं। प्रक्रिया आगे भी निरंतर जारी रहेगी। - आदित्य प्रताप डबास, डीडीए करनाल।