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5 प्रतिशत आक्सीजन लेवल घटा, पक्षी भी बेहोश होकर गिरने लगे

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दीपावली के पहले से शुरू हुई स्मॉग अब जहर बनकर सांसों में घुलने लगी है। एक तरफ जहां सांस और आंखों के रोगियों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है, वहीं अन्य लोगों को भी सांस लेने में दिक्कत होने लगी है। हालात इस कदर नाजुक हो गए हैं कि जिले में पांच प्रतिशत आक्सीजन का लेबल कम हो गया है। इसका असर परिंदों पर भी नजर आने लगा है। गत दिनों के दौरान भारी संख्या में पक्षियों के बेहोश होकर गिरने की जानकारी मिली है। इसमें से करीब 50 कबूतर समेत अन्य पक्षियों का इलाज सेक्टर-6 स्थित जीवो मंगलम पक्षी अस्पताल में हो रहा है। हालातों के मद्देनजर शिक्षा विभाग ने पिछले दिनों सरकारी स्कूलों में आउट डोर गतिविधियां बंद कर दी थीं, अब डीसी ने चार और पांच नवंबर को सरकारी, गैर सरकारी, अनुदान प्राप्त स्कूलाें में छुट्टी की घोषणा की है। सुबह पार्कों और नित्य घूमने जाने वालों की संख्या में भी कमी आने लगी है। रविवार को दिनभर जिले के आसमान स्मॉग से घिरा रहा। रविवार को एक्यूआई में वातावरण में 2.5-पीएम कणों की सांद्रता औसतन 449 और अधिकतम 500 रही। 10-पीएम की सांद्रता औसतन 421, न्यूनतम 216 व अधिकतम 500 रही। इससे आसमान में छाई प्रदूषण की परत से पूरा दिन सूर्य दिखाई नहीं दिया। जिले में ब्लैकआउट सरीखी स्थिति बनी रही। घरौंडा क्षेत्र के कैमला गांव में एक्यूआई 756 आंका गया। इसके बाद भी पराली जलाने समेत अन्य माध्यमों से वायु प्रदूषण करने का काम जारी है।
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आक्सीजन की मात्रा 21 प्रतिशत होनी चाहिए
रसायन शास्त्री डॉ. राकेश भारद्वाज का कहना है कि आक्सीजन लेवल पांच प्रतिशत तक घटना भी चिंताजनक है। वातावरण में 21 प्रतिशत ऑक्सीजन की मात्रा होनी चाहिए। वर्तमान की स्थिति के कारण यह 16 प्रतिशत तक दर्ज हो रही है। वातावरण में मौजूद 2.5-पीएम और 10-पीएम कणों का गुबार हल्की हवा से दूसरे स्थान पर भी रुख कर रहा है। जहां इसका रुख बढ़ता है वहां ज्यादा दिक्कत बढ़ जाती है। अब प्रदूषण का स्तर घातक बन गया है। वातावरण में नमी और ओस की वजह से विषैले कण और सक्रिय हो जाते हैं। वर्षा होने पर ही राहत मिलेगी। इसके अलावा रविवार को अधिक स्मॉग गहराने से दृश्यता कम हो गई है। सुबह के समय दृश्यता महज 100 मीटर रही। दिन चढ़ने के साथ कुछ दूरी तक साफ दिखाई दिया। दिन में भी 200 मीटर तक दृश्यता रही। राष्ट्रीय राजमार्ग स्मॉग के साये में रहा। इस कारण वाहनों की गति मंद हो गई। सड़कों पर दुर्घटनाएं होने का अंदेशा बन चुका है। हवा नहीं चलने की वजह से स्मॉग लगातार गहराती जा रही है।
जहरीली हवा से बेहोश परिंदों का हो रहा इलाज
पिछले छह दिन से वातावरण में छाई घातक गैसों की वजह से बेजुबान परिंदों की जान पर आफत आ गई है। जीवो मंगलम पक्षी अस्पताल की संचालिका साध्वी संतोष कुमारी के अनुसार कुछ दिनों के अंतराल पर करीब 50 पक्षी बेहोश होकर गिर पड़े हैं। स्थानीय लोगों ने सेक्टर-6 स्थित जीवो मंगलम पक्षी अस्पताल में पहुंचाया है। उपचार के बाद उनकी तबीयत ठीक हुई और अभी भी यह परिंदे अस्पताल में ही हैं। इनमें अधिकतर कबूतर हैं। इसके अलावा घुग्गी और बाज भी हैं। यह आंकड़ा उन पक्षियों का है जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल तक पहुंचा दिया गया। जो परिंदे लोगों की नजरों से दूर हैं उनकी कोई खबर नहीं। हालत ऐसे बन गए हैं कि वातावरण में पक्षियों का चहचहाहट और कोलाहल सुनाई देना बंद हो गया है।
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प्रशासन स्थिति पर काबू पाने को ये उठाए तीन कदम
1- सफाई के बाद पानी का छिड़काव : शहर की सफाई रात में होती है। इस दौरान धूल उड़ने से प्रदूषण लेवल न बढ़े। इसके लिए नगर निगम की ओर से विशेष इंतजाम किए गए हैं। रात में सफाई के दौरान दो टेंकर साथ-साथ पानी का छिड़काव करेंगे। तो वहीं दिन में फायर ब्रिगेड की मदद से शहर की सड़कों पर लगे पेड़-पौधों पर पानी डाला जा रहा है। ताकि हवा से धूल न उड़े।
2- कंपोस्ट और नॉन कंपोस्ट कचरे में आग लगाने पर रोक : एनजीटी के निर्देशानुसार शहर मेें कचरे में आग लगाना पूरी तरह से बैन है। बढ़ते प्रदूषण लेवल को देखकर अब नगर निगम कचरे पर आग लगाने पर और सख्ती बरत रहा है। कचरे में आग लगाने पर पांच हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया। क्योंकि कचरे में आग लगने से दम घुटने जैसी स्थिति बनती है।
3- कंस्ट्रक्शन पर प्रतिबंध : शहर के हर एरिया में इन दिनों भवन निर्माण कार्य चल रहा है। बढ़ते प्रदूषण लेवल के कारण नगर निगम ने इन दिनों निर्माण पर भी रोक लगाई है। वहीं निगम की ओर से शहर की सड़कों की मरम्मत के कार्यों को भी रोका गया है, ताकि धूल न उड़े और हवा साफ रहे। विशेषज्ञों के अनुसार, धूल और मिट्टी के कण से स्वास्थ्य पर ज्यादा प्रभाव पड़ता है।
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तीन कदम उठाकर हम भी स्थिति पर काबू पाने में दे सकते हैं योगदान
1- पब्लिक ट्रांसपोर्ट का करें इस्तेमाल : जिले में करीब तीन लाख निजी और एक लाख के करीब कामर्शियल वाहन हैं। उनसे निकलने वाला धुआं भी पर्यावरण को प्रदूषित करता है। आरटीए इंस्पेक्टर जोगिंद्र ढुल का कहना है कि इन दिनों अगर हम निजी की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ज्यादा इस्तेमाल करें, तो स्थिति पर काबू पाने में योगदान दे सकते हैं।
2- खुद आग न लगाएं और दूसरों को भी रोकें : शहर में 97 कॉलोनियां हैं। हर गली में कहीं सफाईकर्मी या कहीं हम खुद कचरे में आग लगाते हैं। इसे बंद करना होगा। पुकार वक्त की संस्था की अध्यक्ष डॉ. कीर्ति गुप्ता का कहना है कि कचरा न जला कर व दूसरों को भी इसे जलाने से रोककर हम अपने व समाज के बेहतर कल के लिए योगदान दे सकते हैं।
3. अपने घर और गली में लगे पौधों को धोएं : पर्यावरण को संतुलित रखने के लिए वन नीति के अनुसार जिले मेें 20 प्रतिशत जमीन पर वन होना चाहिए। करनाल में 9 प्रतिशत पर ही है। इस पर भी करीब चार लाख पौधे लगे हैं। समर्पण मानव सेवा समिति के अध्यक्ष दिलबाग कादियान का कहना है कि अगर हम अपने घर आंगन या गली में लगे पौधों को भी धो दें, तो पर्यावरण संतुलित करने में हमारी आहुति डलेगी।
फिर कब मानेंगे हम : खेत में पराली जल रही, वाहन छोड़ रहे काला धुआं
स्मॉग के कारण ब्लैक आउट की स्थिति क्यों नहीं बनेगी। जब हम दिवाली के बाद से बढ़े प्रदूषण लेवल के बाद भी समझने को तैयार नहीं है। हालात यह हैं कि खेतों में रविवार को भी पराली जली। करनाल में एक्टिव फायर लोकेशन का आंकड़ा भी 900 पार पहुंच चुका है। हाईवे पर हरियाणा रोडवेज और निजी परिवहन समिति की कई बस काला धुआं छोड़ती दिखाई दीं। शहर में कई जगह पुराने वाहनों से धुआं निकलता देखा गया। सदर बाजार, पुराना जीटी रोड, मॉडल टाउन के समीप सेक्टर-12 क्षेत्र, लक्कड़ मार्केट के अलावा कई स्थानों पर निर्माण कार्य जारी रहे। इस कारण धूल के कण उड़ते दिखे। यही नहीं सेक्टर चार के मैदान से जब कोई वाहन गुजरता है तो धूल का गुबार उठता है। उचाना गांव के समीप किसान के खेत में पराली जली। जिस कारण जीटी रोड तक गहरे धुएं का गुबार छा गया।
शहर के बढ़ते प्रदूषण लेवल को कम करने के लिए हमारी तरफ से भी प्रयास किए जा रहे हैं। सरकारी, गैर सरकारी, अनुदान प्राप्त स्कूलों में चार और पांच नवंबर को छुट्टी रहेगी। पर्यावरण कम करने के लिए लोगों को भी वर्तमान स्थिति को समझकर सहयोग देना चाहिए। - निशांत यादव, आयुक्त, नगर निगम करनाल।
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